ब्रेकिंग न्यूज़: बिलासपुर मझवानी पंचायत में 15वें वित्त में लाखों का घोटाला उजागर
ब्रेकिंग न्यूज़: बिलासपुर जिले की मझवानी ग्राम पंचायत में 15वें वित्त में गड़बड़ी का बड़ा खुलासा। सचिव की ऑडियो रिकॉर्डिंग से सरपंच समेत पूरी पंचायत घेरे में।

बिलासपुर की ग्राम पंचायत मझवानी में 15वें वित्त आयोग के लाखों रुपये पर सवाल: कागजों में विकास, धरातल पर भ्रष्टाचार का आरोप, सरपंच-सचिव समेत पूरी पंचायत घेरे में

बिलासपुर/कोटा, छत्तीसगढ़ | छत्तीसगढ़ जनता की आवाज न्यूज़ :- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से पंचायती राज व्यवस्था को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। जनपद पंचायत कोटा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मझवानी / मंजवानी में 15वें वित्त आयोग की राशि के दुरुपयोग का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है।

इस मामले का खुलासा ग्रामीणों द्वारा निकाली गई कैश बुक और छत्तीसगढ़ जनता की आवाज न्यूज़ के संपादक द्वारा पंचायत सचिव गोस्वामी जी से की गई सीधी बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग से हुआ है। यह पूरी ऑडियो रिकॉर्डिंग हमारे पास सुरक्षित है।

अब ग्रामीणों का कहना है कि यह अकेले सचिव का खेल नहीं है, बल्कि सरपंच के हस्ताक्षर के बिना एक रुपया भी नहीं निकल सकता, इसलिए सरपंच, उप-सरपंच, सचिव और पूरी पंचायत बॉडी इस मामले में बराबर की जिम्मेदार है।

ऑडियो रिकॉर्डिंग में क्या है? 2 बड़े खुलासे
खुलासा नंबर 1 – बिना आदेश के एडजस्टमेंट का खेल:
जब संपादक ने FY 2025-26 के खर्चों पर सवाल पूछा, तो सचिव ने बातचीत में कहा – “कई बार बड़े-बड़े कार्यक्रम कराने पड़ते हैं, जिनका कोई लिखित आदेश नहीं मिलता। ऐसे खर्चों को परिस्थिति के अनुसार पंचायत के दूसरे मदों से एडजस्ट करना पड़ता है।”
खुलासा नंबर 2 – VIP कार्यक्रम का खर्च पंचायत मद में?
बातचीत के दौरान सचिव ने स्वीकार किया कि बिल्हा क्षेत्र में आयोजित एक बड़े उच्च-स्तरीय कार्यक्रम में बहुत पैसा खर्च हुआ था, जिसे पंचायत के खर्च में डालना पड़ा।
नियमतः 15वें वित्त का पैसा केवल पेयजल, हैंडपंप मरम्मत, नाली, रोड मरम्मत, मुरमीकरण और पंचायत भवन रखरखाव जैसे बुनियादी कामों पर ही खर्च हो सकता है। किसी भी बड़े कार्यक्रम का खर्च इसमें डालना पूरी तरह से नियम विरुद्ध है।
कैश बुक में एक ही दिन में लाखों का खेल – ग्रामीणों के होश उड़े
ग्रामीणों द्वारा दी गई कैश बुक (वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27) में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली तारीख है 23 फरवरी 2026।
एक ही दिन में दर्ज भुगतान:
• रोड मरम्मत कार्य – 1,09,600 रुपये
• हैंडपंप मरम्मत वार्ड 1,2 – 1,16,020 रुपये
• हैंडपंप मरम्मत व पेयजल सामग्री – 24,900 रुपये
• मुरमीकरण कार्य – 16,900 रुपये
• कचरा कलेक्शन रिक्शा – 48,000 रुपये
• वेतन व मानदेय – 42,000 रुपये
• पंचायत भवन मरम्मत – 5,000 से 17,500 रुपये की कई एंट्रियां
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव का दौरा कर लिया जाए तो न तो उस स्तर की रोड मरम्मत दिखती है, न ही इतने हैंडपंप सुधरे हुए हैं। यह पूरा काम सिर्फ कागजों में हुआ है।
केवल मझवानी नहीं, पूरे सिस्टम पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यह हाल सिर्फ मझवानी का नहीं है। कोटा जनपद की कई अन्य पंचायतों में भी इसी तरह कागजों में मंच मरम्मत, मुरम डालना और रोड बनाना दिखाया जाता है, जबकि जमीन पर कुछ नहीं होता। अगर मझवानी की निष्पक्ष जांच हो गई, तो यह पूरे जिले के लिए नजीर बन जाएगी।
ग्रामीणों की 4 बड़ी मांगें
1. कलेक्टर बिलासपुर और CEO जिला पंचायत बिलासपुर पूरे मामले में स्वतः संज्ञान लें।
2. कैश बुक में दिखाए गए हर काम का जियो-टैग फोटो, वीडियो और तकनीकी टीम द्वारा भौतिक सत्यापन कराया जाए।
3. हमारे पास मौजूद ऑडियो रिकॉर्डिंग को जांच का मुख्य आधार बनाकर सरपंच, उप-सरपंच, सचिव सहित पूरी पंचायत से पूछताछ हो।
4. जांच में गड़बड़ी मिलने पर राशि की वसूली और दोषियों को पद से हटाने की कार्रवाई हो।
संपादक की कलम से: हमारे पास ग्रामीणों द्वारा दी गई कैश बुक की कॉपी और सचिव के साथ हुई सीधी बातचीत की पूरी ऑडियो रिकॉर्डिंग पुख्ता सबूत के तौर पर मौजूद है। हमारा उद्देश्य किसी एक व्यक्ति को टारगेट करना नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। सरपंच सहित पूरी पंचायत का पक्ष आने पर उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
डिस्क्लेमर: यह समाचार ग्रामीणों की शिकायत, उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज और संपादक द्वारा की गई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर जनहित में प्रकाशित किया गया है। इसका उद्देश्य जांच की मांग करना है।
नोट :- इसका पार्ट 2 कुछ दिनों में प्रकाशित होगा




