Bilaspur News: अरपा एनीकट में बहा 60 साल का किसान, 48 घंटे बाद मिला शव
बिलासपुर के चकरभाठा थाना के मगरउछला डिपरापारा एनीकट में काई पर फिसलने से 60 वर्षीय किसान तिजराम कैवर्त अरपा नदी में बहा। 2 दिन चले रेस्क्यू के बाद मिला शव।

बिलासपुर के मगरउछला एनीकट में फिर बुझा एक चिराग: तहसील जा रहे 60 साल के किसान की काई पर फिसलने से अरपा में डूबकर मौत, छोटे भाई ने आँखों के सामने हाथ छूटते देखा

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) | चकरभाठा – ग्राम मगरउछला डिपरापारा | 01 अक्टूबर 2026 :- बिलासपुर जिले में एक बार फिर अरपा नदी के एनीकट ने एक गरीब किसान परिवार की खुशियां छीन लीं। जमीन का कागज सही कराने के लिए घर से निकला 60 वर्षीय किसान रास्ते में ही काल के गाल में समा गया। मंगलवार सुबह हुई इस दर्दनाक घटना के बाद 48 घंटे तक पूरा गांव और प्रशासन नदी में उसकी तलाश करता रहा, आखिर में गुरुवार सुबह उसका शव मिला।
तहसील जा रहा था किसान, एनीकट पर फिसला पैर
मृतक का नाम तिजराम कैवर्त, उम्र 60 साल, निवासी ग्राम मगरउछला है। परिवार वालों ने बताया कि तिजराम की जमीन के खाते में कुछ गड़बड़ी थी, उसे ठीक कराने के लिए वह मंगलवार सुबह करीब 9:30 बजे अपने छोटे भाई बबलू कैवर्त के साथ तहसील जाने के लिए निकला था।
गांव से तहसील जाने के लिए अरपा नदी पर बने डिपरापारा एनीकट से होकर गुजरना पड़ता है। बरसात के दिनों में नदी का पानी एनीकट के ऊपर से बहता है। एनीकट पर काई जमने से वह बहुत फिसलन भरा हो जाता है। तिजराम जैसे ही एनीकट पर पहुंचा, उसका पैर काई पर फिसल गया और वह सीधे उफनती अरपा नदी के तेज बहाव में जा गिरा।
छोटे भाई ने नदी में कूदकर बचाने की आखिरी कोशिश की
यह मंजर देखकर छोटा भाई बबलू घबरा गया। उसने बिना कुछ सोचे अरपा में छलांग लगा दी। बबलू ने बताया – “भैया को गिरते देखा तो मैं कूद गया। तैरकर मैंने उनका हाथ पकड़ भी लिया था। कुछ देर तक खींचने की कोशिश की, लेकिन पानी का बहाव बहुत तेज था, लहरें हाथ पर मार रही थीं, अचानक हाथ छूट गया और भैया गहरे पानी में गायब हो गए।”
नदी से बाहर आकर बबलू ने शोर मचाया, गांव वालों और चकरभाठा थाने को सूचना दी।
2 दिन तक चला तलाशी अभियान, तब मिला शव
सूचना मिलते ही चकरभाठा पुलिस, गोताखोर और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। मंगलवार को टीम ने बोट की मदद से एनीकट के नीचे, जहां जलकुंभी और झाड़ियां हैं और जहां गहरे भंवर बनते हैं, करीब 6 घंटे तक तलाश की। लेकिन अंधेरा होने के कारण पहले दिन काम रोकना पड़ा।
बुधवार को सुबह से फिर तलाश शुरू हुई। SDRF की टीम भी बुलाई गई। लेकिन पानी गंदा होने और अंदर कुछ दिखाई नहीं देने से बुधवार शाम को भी टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा। परिवार की उम्मीदें टूटने लगी थीं।
आखिरकार गुरुवार सुबह फिर से सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया और कुछ ही देर में तिजराम कैवर्त का शव बरामद कर लिया गया। चकरभाठा थाना प्रभारी भावेश शेंडे ने दोपहर में शव मिलने की पुष्टि की है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
ये एनीकट क्यों है मौत का एनीकट?
यह पहला हादसा नहीं है। मगरउछला-डिपरापारा का यह एनीकट हर बरसात में हादसों का अड्डा बन जाता है। गांव वालों का कहना है कि पिछले 2 साल में ही इस एनीकट पर 20 से ज्यादा लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है।
सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि इतनी मौतों के बाद भी यहां सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। न किनारे पर मजबूत रेलिंग लगी है, न फिसलन से बचाने के लिए कोई उपाय है, न खतरे का कोई चेतावनी बोर्ड लगा है और न ही बरसात में यहां कोई होमगार्ड या जवान तैनात किया जाता है। रोजाना सैकड़ों ग्रामीण, स्कूली बच्चे और किसान इसी खतरनाक रास्ते से जान जोखिम में डालकर गुजरते हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस एनीकट पर तुरंत सुरक्षा रेलिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और बरसात के दिनों में यहां जवान तैनात किया जाए, ताकि फिर किसी तिजराम की जान इस तरह न जाए।


