कोटा-आमागोहन में 15वें वित्त की CC रोड में बड़ा घोटाला, निजी आंगन में सरकारी पैसा लगाने का आरोप – जांच की मांग
ग्राम पंचायत आमागोहन कोटा में 15वें वित्त आयोग से बनी 100 मीटर सीसी रोड में अनियमितता का आरोप। वार्ड 5 की पंच नेहा जायसवाल पर निजी आंगन की ढलाई कराने का आरोप, ग्रामीणों ने की तकनीकी जांच और वसूली की मांग।

छत्तीसगढ़ जनता की आवाज – बड़ी खबर
कोटा के आमागोहन में 15वें वित्त के पैसे से बड़ा खेल! 100 मीटर की CC रोड के नाम पर निजी आंगन चमकाने का आरोप, गांव में हड़कंप ग्राम पंचायत आमागोहन में सरकारी राशि के दुरुपयोग का सनसनीखेज मामला, गुणवत्ता पर भी उठे गंभीर सवाल, कलेक्टर से जांच की मांग

कोटा / आमागोहन, छत्तीसगढ़ | छत्तीसगढ़ जनता की आवाज न्यूज़ :- कोटा विकासखंड की ग्राम पंचायत आमागोहन से भ्रष्टाचार से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने पंचायती राज व्यवस्था में विकास कार्यों की पोल खोल कर रख दी है। केंद्र सरकार द्वारा गांव के विकास के लिए भेजी जाने वाली 15वें वित्त आयोग की राशि का दुरुपयोग होने का गंभीर आरोप लगा है।

मामला आमागोहन में बनी करीब 100 मीटर लंबी सीसी रोड का है। यह रोड सचिन केसरवानी के घर से लेकर तिरुपति राव के घर तक बनाई गई है। कागजों में तो यह रोड गांव के विकास की तस्वीर दिखाती है, लेकिन जमीनी हकीकत में इसी रोड को लेकर अब ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

क्या है पूरा मामला? समझिए आम भाषा में
ग्राम पंचायत आमागोहन को 15वें वित्त आयोग के तहत गांव में विकास कार्य कराने के लिए राशि मिली थी। इसी राशि से वार्ड में करीब 100 मीटर लंबी सीसी रोड का निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया।
शुरुआत में तो ग्रामीण खुश थे कि चलो पक्की सड़क बनेगी। लेकिन जैसे ही सड़क का काम पूरा हुआ, ग्रामीणों ने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि सड़क निर्माण में भारी अनियमितता बरती गई है और सरकारी पैसे को निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने इस संबंध में लिखित शिकायत प्रशासन को सौंपी है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
सबसे बड़ा आरोप – सड़क के साथ-साथ निजी आंगन की भी ढलाई!
इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह एक बेहद गंभीर आरोप है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि वार्ड क्रमांक 5 की पंच श्रीमती नेहा जायसवाल द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सीसी रोड निर्माण के साथ-साथ अपने घर के सामने स्थित निजी आंगन की भी ढलाई करा ली गई है।
आरोप है कि जो सीमेंट, गिट्टी, रेत पंचायत की राशि से सड़क के लिए आई थी, उसी से निजी आंगन को पक्का कर दिया गया। ग्रामीणों का सीधा सवाल है – क्या 15वें वित्त का पैसा किसी पंच के निजी आंगन को चमकाने के लिए दिया जाता है? यह जनता के पैसे का सीधा-सीधा दुरुपयोग है।
शिकायत में विशेष रूप से मांग की गई है कि यह जांच की जाए कि स्वीकृत सीसी रोड की निर्धारित सीमा के बाहर कहीं पंचायत की राशि से निजी उपयोग के लिए निर्माण तो नहीं कराया गया। यदि शासकीय राशि से निजी परिसर में काम कराया गया है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
100 मीटर की रोड पर गुणवत्ता के भी 100 सवाल
अनियमितता का मामला सिर्फ निजी आंगन तक ही सीमित नहीं है। सड़क की गुणवत्ता को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
गुणवत्ता पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता ने केवल वित्तीय अनियमितता ही नहीं, बल्कि सीसी रोड की गुणवत्ता की भी तकनीकी जांच कराने की मांग की है। मांग की गई है कि सड़क की लंबाई-चौड़ाई, मोटाई, इस्तेमाल की गई सामग्री, सीमेंट-कांक्रीट की गुणवत्ता और स्वीकृत मापदंडों के अनुरूप निर्माण हुआ या नहीं, इसका स्थल परीक्षण कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क देखने में ही कमजोर लग रही है और आशंका है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। अगर सही जांच हुई तो गुणवत्ता की पोल भी खुल जाएगी।
इन दस्तावेजों की जांच से खुलेगा सच – शिकायत में की गई मांग
शिकायत में अधिकारियों से निर्माण कार्य से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कागज ही सच बताएंगे।
जांच के लिए मांगे गए दस्तावेजों की सूची
1. स्वीकृत कार्य एवं प्रशासकीय स्वीकृति
2. तकनीकी स्वीकृति और प्राक्कलन
3. माप पुस्तिका (एमबी)
4. कार्य की वास्तविक लंबाई एवं क्षेत्रफल का विवरण
5. बिल-वाउचर एवं भुगतान अभिलेख
6. निर्माण में उपयोग सामग्री का विवरण
7. रोड निर्माण की गुणवत्ता एवं तकनीकी मापदंड की रिपोर्ट
इन सभी दस्तावेजों का मिलान मौके की स्थिति से किया जाए तो सारा सच सामने आ जाएगा।
जांच में गड़बड़ी मिली तो होगी वसूली और कार्रवाई
आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि जांच के दौरान पंचायत की राशि का उपयोग स्वीकृत कार्य से अलग या निजी उपयोग में होना पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति एवं अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
साथ ही शासकीय राशि की वसूली भी की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यह पैसा सरकार का नहीं, बल्कि आम जनता के विकास का पैसा है और इसका हिसाब होना ही चाहिए।
गांव में आक्रोश, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की उम्मीद
इस मामले के सामने आने के बाद ग्राम पंचायत आमागोहन में ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर 100 मीटर की छोटी सी सड़क में इतना बड़ा खेल हो सकता है तो बड़े कार्यों में क्या होता होगा।
अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है और कब तक जांच टीम मौके पर पहुंचकर सच्चाई का पता लगाती है।
छत्तीसगढ़ जनता की आवाज न्यूज़ इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। जांच रिपोर्ट आते ही हम आपको अपडेट देंगे।




