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Raigarh Breaking:-घरघोड़ा में खसरा नंबर 86 का 47 साल पुराना राज बेनकाब, रायगढ़ कलेक्टर से 1979 से 2026 तक रिकॉर्ड जांच और BS Ispat जमीन सौदे पर Stay की मांग

रायगढ़ के घरघोड़ा, ग्राम चारमार में पैतृक जमीन खसरा नंबर 86 पर विवाद। आवेदक सरधाकर उर्फ सरधा राम गुप्ता ने कलेक्टर से 1979 के 58.543 हेक्टेयर संयुक्त खाते से लेकर 28.09.2026 की पर्यावरण जनसुनवाई तक जांच और यथास्थिति की मांग की।

रायगढ़ – घरघोड़ा के चारमार में 47 साल बाद फूटा जमीन का एटम बम! खसरा नंबर 86 से BS Ispat तक, 1979 से 2026 तक के हर कागज की जांच की मांग, 28 सितंबर की जनसुनवाई पर स्टे की तलवार

Photograph of the applicant at the Collectorate office while submitting the application

रायगढ़ / घरघोड़ा, छत्तीसगढ़। दिनांक 16.09.2026 को जिला कलेक्टर रायगढ़ के समक्ष एक ऐसा आवेदन पेश हुआ है जिसने पूरे जिले के राजस्व महकमे में हड़कंप मचा दिया है। ग्राम चारमार, थाना घरघोड़ा निवासी आवेदक सरधाकर उर्फ सरधा राम गुप्ता पिता स्व. उसतो गुप्ता ने अपनी पैतृक एवं संयुक्त भूमि से संबंधित गंभीर शिकायत दर्ज कराई है।

Photograph of the applicant at the Collectorate office while submitting the application

 आवेदन का विषय है – पैतृक एवं संयुक्त भूमि के अंतिम बंटवारा एवं सीमांकन से पूर्व कंपनी द्वारा खरीदे गए / प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना से संबंधित भूमि पर निर्माण एवं भूमि की प्रकृति में परिवर्तन पर तत्काल अंतरिम रोक (Stay) लगाए जाने, प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई के संबंध में आवश्यक वैधानिक कार्यवाही किए जाने तथा वर्ष 1979 से वर्तमान तक खसरा नंबर 86 एवं उससे निर्मित / विभाजित खसरों के संपूर्ण राजस्व अभिलेख, बंटवारा, नामांतरण, विक्रय, हस्तांतरण एवं मुआवजा संबंधी अभिलेखों की जांच कराए जाने बाबत।

1. वर्ष 1979 के पैतृक एवं संयुक्त खाते की स्थिति  सबसे बड़ा सवाल

आवेदक ने बताया कि वर्ष 1979 में मेरे पिता उसतो के पैतृक / संयुक्त खाते में लगभग 58.543 हेक्टेयर भूमि थी, जिसमें मेरे पिता का हिस्सा लगभग 29.2751 हेक्टेयर बनता था। वर्तमान में उक्त संयुक्त खाते में लगभग 57 एकड़ भूमि शेष बताई जा रही है। अतः वर्ष 1979 से वर्तमान तक भूमि के रकबे में हुए प्रत्येक परिवर्तन, बंटवारे, नामांतरण, विक्रय, हस्तांतरण एवं अन्य प्रविष्टियों का खसरा-वार एवं दस्तावेज-वार मिलान कराया जाना आवश्यक है।

2. मूल खसरा नंबर 86 की राजस्व स्थिति

वर्ष 1979 में मूल खसरा नंबर 86 का रकबा लगभग 29 हेक्टेयर बताया जाता है। वर्तमान में इससे संबंधित भूमि का रकबा / स्थिति अलग दिखाई दे रही है। इसलिए मूल खसरा 86 से वर्तमान तक बने सभी उप-खसरों का पूरा राजस्व इतिहास निकालकर रकबा घटने-बढ़ने का अभिलेखीय परीक्षण कराया जाए।

3. खसरा नंबर 86 का लंबित बंटवारा

खसरा नंबर 86 के संबंध में बंटवारा / राजस्व विवाद की कार्यवाही लंबित है तथा अंतिम सीमांकन / बंटवारा पूर्ण नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में किसी एक पक्ष के हिस्से को अंतिम रूप से निर्धारित मानकर तीसरे पक्ष द्वारा निर्माण अथवा स्थायी कब्जे की स्थिति उत्पन्न करना विवाद को और जटिल कर सकता है।

4. 1/2 बंटवारा आवेदन खारिज और फौती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल

मेरे द्वारा हाल में प्रस्तुत 1/2 बंटवारा आवेदन को मेरे पिता द्वारा लगभग 4-6 माह पूर्व पैतृक एवं संयुक्त भूमि में 1/2 हिस्से के बंटवारे हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था। उक्त आवेदन को माननीय नायब तहसीलदार महोदय द्वारा इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि संबंधित अभिलेखों में दर्ज दो व्यक्तियों की मृत्यु हो चुकी है।

 इस संबंध में निवेदन है कि उक्त दोनों मृत व्यक्ति मेरे पिता उसतो के परिवार से संबंधित नहीं हैं, बल्कि मेरे बड़े दादा के परिवार से संबंधित हैं। अतः यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि उनके निधन का मेरे पिता के वैधानिक हिस्से के 1/2 बंटवारे के आवेदन पर किस आधार पर प्रभाव माना गया।

 यदि उक्त मृत व्यक्तियों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज थे, तो उनके निधन के पश्चात उनके विधिक वारिसों के नाम फौती / उत्तराधिकार नामांतरण की आवश्यक राजस्व प्रक्रिया पूर्ण कर अभिलेखों को अद्यतन किए जाने की आवश्यकता थी। अतः यह जांच की जाए कि संबंधित व्यक्तियों की मृत्यु के बाद उनकी फौती / उत्तराधिकार प्रविष्टि के संबंध में क्या कार्यवाही की गई तथा यदि कार्यवाही नहीं की गई तो उसका कारण क्या था।

 साथ ही यह भी जांच का विषय है कि यदि फौती दर्ज किए बिना बंटवारा / अभिलेख सुधार संभव नहीं था, तो पूर्व में मेरे बड़े भाई लखपति एवं उनके परिजन के परिवार के पुत्रों द्वारा मेरे भाई लखपति का परिवार की सहमति / दस्तखत अथवा उनके वैधानिक अधिकार का निर्धारण किए बिना उक्त भूमि का बंटवारा, नामांतरण एवं विक्रय किस आधार पर कराया गया।

 आवेदक ने 1979 से वर्तमान तक खसरा नंबर 86 एवं उससे बने सभी उप-खसरों के संबंध में निम्न बिंदुओं की विशेष जांच की मांग की है –

1. किन व्यक्तियों के नाम मूल राजस्व अभिलेखों में दर्ज थे।

2. किस व्यक्ति की मृत्यु कब हुई और उसके बाद फौती / उत्तराधिकार नामांतरण कब एवं किस आदेश से किया गया।

3. मेरे दादा के परिवार एवं मेरे बड़े दादा के परिवार के वैधानिक हिस्से का अभिलेखीय निर्धारण किस आधार पर किया गया।

4. मेरे दादा के हस्ताक्षर / सहमति के बिना यदि कोई बंटवारा, नामांतरण अथवा विक्रय हुआ है तो उसके आधारभूत दस्तावेज, आदेश-पत्रिका, पंचनामा एवं संबंधित अभिलेख प्रस्तुत कर जांचे जाएं।

5. पूर्व में किए गए बंटवारे, नामांतरण एवं विक्रय की तुलना हाल में मेरे पिता द्वारा प्रस्तुत 1/2 बंटवारा आवेदन के साथ की जाए।

6. मेरे 1/2 बंटवारा आवेदन को खारिज किए जाने वाले आदेश की प्रमाणित प्रति, उसमें दर्ज कारण एवं संबंधित संपूर्ण प्रकरण नस्ती की जांच कराई जाए।

7. मेरे भाई लखपति के परिवार के सदस्यों द्वारा किए गए भूमि हस्तांतरण, बंशी, गजाधर, बालेश्वर तथा उनके भाई / परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज भूमि एवं उनके द्वारा किए गए विक्रय / हस्तांतरण की जांच की जाए तथा यह देखा जाए कि प्रत्येक हस्तांतरण संबंधित व्यक्ति के वैधानिक हिस्से एवं अधिकार के भीतर था अथवा नहीं।

5. वर्ष 2012 में रेलवे द्वारा ली गई भूमि एवं मुआवजा की जांच

वर्ष 2012 में रेलवे द्वारा अधिग्रहित / ली गई भूमि के संबंध में अधिग्रहण अधिसूचना, अवार्ड, खसरा-वार रकबा, भुगतान विवरण एवं मुआवजा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के अभिलेख मंगाकर जांचे जाएं। यदि किसी वास्तविक हिस्सेदार / अधिकारधारी को उसका वैधानिक मुआवजा प्राप्त नहीं हुआ है तो नियमानुसार उसका परीक्षण एवं आवश्यक कार्यवाही की जाए।

6. पृथक राजस्व खाते एवं ऋण पुस्तिका की जांच

परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पृथक राजस्व खाते / ऋण पुस्तिका दर्ज होने तथा मेरे संबंधित परिवार के नाम समान प्रकार की प्रविष्टि न होने के आधार एवं प्रक्रिया की जांच की जाए और वर्ष 1979 से वर्तमान तक की सभी संबंधित राजस्व प्रविष्टियों का तुलनात्मक परीक्षण कराया जाए।

7. कंपनी द्वारा खरीदे गए मूल खसरा 86 से बने उप-खसरों की संपूर्ण जांच – BS Ispat कनेक्शन

बताया जा रहा है कि BS Ispat कंपनी द्वारा मूल खसरा नंबर 86 से बने / विभाजित निम्न खसरों में भूमि खरीदी गई है –

86/7, 86/33, 86/1, 86/2, 86/3, 86/4, 86/5, 86/6, 86/8, 86/10, 86/11, 86/12, 86/14, 86/15, 86/19, 86/20, 86/25, 86/31, 86/34, 86/35, 86/36, 86/37, 86/38 एवं 86/42

 इन सभी खसरों की वर्ष 1979 से वर्तमान तक की संपूर्ण राजस्व श्रृंखला, मूल खसरा, उप-विभाजन, रकबा, बंटवारा आदेश, नामांतरण, सीमांकन, विक्रय विलेख एवं वर्तमान स्वामित्व का मिलान कराया जाए तथा प्रत्येक विक्रेता के वैधानिक हिस्से / अधिकार की जांच की जाए।

8. कंपनी को बिक्री से पूर्व वास्तविक हिस्सेदारी की जांच

कंपनी द्वारा भूमि खरीदते समय विक्रेताओं के पास वास्तविक एवं वैधानिक रूप से हस्तांतरण योग्य हिस्सा था अथवा नहीं, इसका परीक्षण किया जाए। विशेष रूप से संयुक्त / पैतृक भूमि में बिना अंतिम बंटवारे के किए गए हस्तांतरण का प्रभाव संबंधित सभी सह-हिस्सेदारों के अधिकारों पर पड़ता है या नहीं, इसका राजस्व अभिलेखों के आधार पर निर्धारण किया जाए।

अंतरिम रोक (Stay) के संबंध में विशेष निवेदन

जब तक खसरा नंबर 86 एवं उससे बने संबंधित उप-खसरों का अंतिम बंटवारा, सीमांकन तथा उपर्युक्त अभिलेखीय जांच पूर्ण नहीं हो जाती, तब तक संबंधित विवादित / संयुक्त भूमि पर BS Ispat कंपनी अथवा किसी अन्य पक्ष द्वारा निर्माण कार्य, भूमि समतलीकरण, पेड़ कटाई, भूमि की प्रकृति में परिवर्तन, स्थायी संरचना निर्माण अथवा कब्जे की स्थिति बदलने वाली कोई कार्यवाही न किए जाने हेतु तत्काल अंतरिम रोक (Stay) एवं यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पारित किया जाना न्यायहित में आवश्यक है। क्योंकि निर्माण / परियोजना की गतिविधियां शुरू हो जाने के बाद यदि अभिलेखीय जांच में हिस्सेदारी अथवा हस्तांतरण संबंधी कोई अंतर पाया जाता है, तो मूल स्थिति बहाल करना अत्यंत कठिन हो सकता है।

दिनांक 28.09.2026 की प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई के संबंध में

दिनांक 28.09.2026 को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई से पूर्व उपर्युक्त भूमि स्वामित्व, लंबित बंटवारा एवं राजस्व अभिलेखों से संबंधित तथ्यों का सक्षम विभागों से परीक्षण कराया जाना आवश्यक है। अतः विवादित भूमि के अधिकार एवं अभिलेखीय स्थिति स्पष्ट किए बिना परियोजना से संबंधित ऐसी कोई कार्यवाही न की जाए जिससे लंबित विवादित अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े। पर्यावरण जनसुनवाई एवं परियोजना से संबंधित आगे की कार्यवाही में इस आवेदन में उठाए गए बिंदुओं को अभिलेख पर लिया जाए।

आवेदक – सरधाकर उर्फ सरधा राम गुप्ता, निवासी – चारमार, थाना घरघोड़ा, जिला रायगढ़ (छत्तीसगढ़)

 

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