Bilaspur Breaking: मस्तूरी-कोरबा नेशनल हाईवे पर 6 फैमिली ढाबों का पर्दाफाश, ग्राउंड रिपोर्ट में खुलेआम अवैध शराब बिक्री का खुलासा
मस्तूरी-कोरबा नेशनल हाईवे पर फैमिली ढाबा के नाम पर अवैध शराब का काला कारोबार, 'छत्तीसगढ़ जनता की आवाज' की ग्राउंड रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

बिलासपुर-मस्तूरी-कोरबा नेशनल हाईवे पर ‘फैमिली ढाबा’ के नाम पर अवैध शराब बिक्री का आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश – कार्रवाई की मांग

बिलासपुर / मस्तूरी। जिला बिलासपुर के मस्तूरी-कोरबा नेशनल हाईवे की तस्वीर बदलती जा रही है। जहां कभी परिवार के साथ लोग खाना खाने रुकते थे, आज वहां लगे चमचमाते फैमिली ढाबे अब विवादों के केंद्र बनते जा रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हाईवे किनारे संचालित कई ढाबों पर अवैध रूप से शराब बिक्री करने और बैठाकर पिलाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

फोटो में दिख रहे प्रमुख ढाबे – हिमांशु फैमिली ढाबा, गोपेश ढाबा फैमिली रेस्टोरेंट, ओएसिस कैफे रेस्टोरेंट, एनएच 45 फैमिली ढाबा, अमन 2.0 फैमिली ढाबा और धनराज दा ढाबा फैमिली ढाबा – इन सभी के बोर्ड पर तो ‘फैमिली’ लिखा है, लेकिन आरोप है कि हकीकत में यहां फैमिली कम और शराब पीने वालों का जमावड़ा ज्यादा रहता है।
क्या है पूरा मामला? ग्रामीणों ने क्या शिकायत की?
स्थानीय लोगों के अनुसार मस्तूरी-कोरबा रोड पर शाम 7 बजे के बाद इन ढाबों का नजारा बदल जाता है। आरोप है कि यहां बाहरी लोगों को शराब उपलब्ध कराई जाती है और टेबल-कुर्सी लगाकर पिलाई जाती है। जिसके कारण कई बार आपसी विवाद और हंगामे की स्थिति भी बनती है। हाईवे से गुजरने वाली महिलाओं और परिवारों को असहजता का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि इसकी लिखित और मौखिक शिकायत मस्तूरी थाना पुलिस से लेकर जिला आबकारी विभाग, बिलासपुर तक की जा चुकी है, लेकिन आज तक मौके पर कोई बड़ी जांच या कार्रवाई देखने को नहीं मिली।
नाम फैमिली का, ग्राहक सिर्फ शराबियों के?
सबसे बड़ी विडंबना यही है। सभी संचालकों ने अपने प्रतिष्ठान के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘फैमिली रेस्टोरेंट’ लिखवा रखा है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि अब स्थिति यह हो गई है कि कोई भी जागरूक परिवार इन ढाबों पर रुकना पसंद नहीं करता। एक ग्रामीण ने बताया कि “बोर्ड पर फैमिली लिख देने से ढाबा पारिवारिक नहीं हो जाता। यहां फैमिली नहीं, सिर्फ नशा करने वाले लोग रुकते हैं।”
सबसे बड़ा सवाल – कार्रवाई क्यों नहीं? किसका संरक्षण?
इसी बात को लेकर अब लोगों में आक्रोश है। शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होने से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर इन ढाबा संचालकों में इतना आत्मविश्वास कहां से आ रहा है? ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ संचालक खुलेआम कहते हैं कि उनका कोई कुछ नहीं कर सकता।
ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या इन प्रतिष्ठानों को कहीं न कहीं से शासन या प्रशासनिक स्तर पर अनदेखी का लाभ मिल रहा है? या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक संरक्षण काम कर रहा है? निष्पक्ष जांच के बिना सच्चाई सामने आना मुश्किल है।
जनहित में प्रशासन से मांग
बिलासपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक द्वारा मस्तूरी-कोरबा नेशनल हाईवे पर स्थित सभी ढाबों की रात्रिकालीन औचक जांच कराई जाए।
आबकारी विभाग स्पष्ट करे कि इन ढाबों में से कितनों के पास वैध बार लाइसेंस है।
हाईवे पर लगे सीसीटीवी और ढाबों की गतिविधियों की जांच कर आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
यह खबर किसी व्यक्तिगत रंजिश के लिए नहीं, बल्कि बिलासपुर जिले की छवि और हाईवे पर सफर करने वाले हजारों परिवारों की सुरक्षा के लिए जनहित में उठाई गई है। शासन प्रशासन से निवेदन है कि निष्पक्ष कार्रवाई बेहद जरूरी है।
नोट / संपादकीय टिप्पणी:
यह खबर हवाई फायर नहीं है। यह पूरी ग्राउंड रिपोर्ट ‘छत्तीसगढ़ जनता की आवाज’ न्यूज़ के संपादक द्वारा स्वयं मस्तूरी-कोरबा नेशनल हाईवे पर जाकर, मौके पर जांच कर तैयार की गई है। जांच के दौरान पाया गया है कि उक्त सभी ढाबों पर अवैध शराब बिक्री करते और बैठाकर पिलाते हुए पाया गया है।
