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Ambikapur News: TS Baba बेच रहे हैं ‘तपस्या’ कोठी, सरगुजा महाराज का बड़ा फैसला

छत्तीसगढ़ के सरगुजा महाराज टीएस सिंहदेव अंबिकापुर की अपनी ऐतिहासिक 2.25 एकड़ की 'तपस्या' कोठी बेच रहे हैं। जानिए 500 करोड़ से 447 करोड़ तक संपत्ति घटने की पूरी कहानी, बिजली बिल, होटल प्रोजेक्ट और राजपरिवार का सच।

सरगुजा महाराज का बड़ा फैसला: अंबिकापुर की ऐतिहासिक 2.25 एकड़ ‘तपस्या’ कोठी से नया अध्याय शुरू करेंगे टीएस बाबा, बोले – परिवार के लिए स्थायी आय का स्रोत बनाना है

T.S. Baba holding a meeting at his royal palace

अंबिकापुर, सरगुजा (छत्तीसगढ़) :- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 350 किलोमीटर दूर सरगुजा संभाग के मुख्यालय अंबिकापुर से प्रदेश की सियासत से जुड़ी सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सरगुजा राजपरिवार के मुखिया, पूर्व उपमुख्यमंत्री और अंबिकापुर के 3 बार विधायक रहे त्रिभुवनेश्वर शरण सिंह देव यानी टीएस बाबा अपनी सबसे चर्चित और सबसे प्रिय कोठी ‘तपस्या’ को लेकर एक बड़ा फैसला लेने जा रहे हैं।

T.S. Baba holding a meeting at his royal palace

यह फैसला किसी मजबूरी का नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी राजा की सोच का फैसला है, जो अपनी पुश्तैनी विरासत को आने वाली पीढ़ी के लिए स्थायी आय के स्रोत में बदलना चाहते हैं।

1. क्या है अंबिकापुर की ‘तपस्या’ कोठी की पूरी कहानी?

Tapasya Kothi Ambikapur

अंबिकापुर शहर के बीचों-बीच स्थित यह कोठी सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि सरगुजा की सियासत का पावर सेंटर रही है।

• निर्माण साल: इस कोठी का निर्माण साल 1997-98 के दौरान किया गया था। 

• कुल क्षेत्रफल: जिस जमीन पर तपस्या कोठी बनी है उसका कुल क्षेत्र सवा दो एकड़ के आसपास है।

• भवन की संरचना: इस कोठी में तीन बेडरूम और तीन हॉल है जो आकार में बहुत बड़े हैं।

• परिसर: इसके परिसर में तीन साइड लॉन है और एक साइड ऑफिस एरिया भी है।

• स्विमिंग पूल: साथ ही इसमें एक स्विमिंग पूल भी है जो फिलहाल बंद है।

• पहचान: इसके गेट पर आज भी ‘तपस्या – तपा ताम मुच्यते’ और ‘तपस्या कोठी’ का बोर्ड लगा हुआ है।

• कीमत: जानकारी के मुताबिक अभी इसकी कीमत करोड़ों रुपए में है।

2. अंबिकापुर में टीएस बाबा के दो आवास – तपस्या और कोठीघर का सच

बहुत कम लोगों को पता है कि सरगुजा राजपरिवार के अंबिकापुर में दो ऐतिहासिक आवास हैं।

पहला है ‘तपस्या’ जो टीएस सिंहदेव का निजी निवास है, जहां उनका परिवार रहता है और उन्होंने अपना लंबा समय गुजारा है। दूसरा है ऐतिहासिक ‘कोठीघर पैलेस’। कोठीघर का उपयोग कई सालों तक कांग्रेस कार्यालय के रूप में किया जाता रहा है। राजपरिवार के लोग जब बाहर से अंबिकापुर आते हैं तो वे कोठीघर में ही रहते हैं। इसका निर्माण कई साल पहले पैलेस के क्षतिग्रस्त होने के बाद कराया गया था।

अभी हाल ही में कोठीघर परिसर में चोरी की घटना भी सामने आई थी, जहां पोर्च पर लगी 15 किलो वजनी पीतल की हाथी की मूर्ति चोरी हो गई थी, जो 2 साल पहले रेनोवेट के समय लगाई गई थी।

3. टीएस बाबा ने खुद बताई ‘तपस्या’ बेचने की असली वजह

जब इस पूरे मामले पर टीएस बाबा से बात की गई तो उन्होंने बेहद साफगोई और बेबाकी से अपनी बात रखी, जो किसी बड़े नेता में कम ही देखने को मिलती है।

उन्होंने कहा:

“मेरे पास अगर दो घर हैं मैं तो एक में ही रहूंगा और दो को रखूंगा तो दो के खर्चे भी तो स्वाभाविक हैं। एक घर में रहना वो सामान्य बुद्धि भी कहेगी। पचास-पचास, साठ-साठ हजार का बिजली बिल तपस्या का आता है। अभी वो भी घर चलेगा वो भी घर चलेगा, परिवार के भी खर्चे फिर और काम करने हैं। अभी कहीं कॉम्प्लेक्स बन रहा है, कहीं वो होटल बनाने का हम लोग काम कर रहे हैं। पैसा कहाँ से आएगा? हम लोगों के पास तो यही माध्यम है, पूर्वजों की दी हुई जो धरोहर है, संपत्ति है।”

उन्होंने आगे कहा, “हालांकि आने वाली पीढ़ी के लिए ये अच्छा होता कि मैं ऐसा प्रबंधन कर लेता कि उसकी जरूरत न पड़े लेकिन अभी वैसी स्थिति नहीं होने के कारण जहाँ-जहाँ पैसे की आवश्यकता और उसके ऊपर कोई स्थायी आय के स्रोत बनाना ताकि परिवार की देखरेख के लिए बेच-बेच के काम न हो। अगर बेच-बेच के हो रहा है तो मैं उतना नहीं कर पाया हूँ जितना काम परिवार के लिए एक मासिक खर्च के लिए राशि उपलब्ध करा सकूँ तो वो बेचना पड़ रहा है।”

और सबसे बड़ी बात उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि, “ये राजनीति में भी स्वाभाविक है कि घर की काफी राशि काम में आती है।”

4. भूपेश बघेल और टीएस बाबा की अंबिकापुर में मुलाकात का सियासी एंगल

T.S. Baba holding a meeting at his royal palace Meeting at

इसी बीच अंबिकापुर के होटल मयूरा में कांग्रेस का तीन दिवसीय संभागीय प्रशिक्षण शिविर चल रहा था, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पीसीसी चीफ दीपक बैज और टीएस सिंहदेव समेत कई नेता पहुंचे थे। इसी दौरान भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव की मुलाकात हुई।

बघेल ने टीएस बाबा से पूछा कि कहाँ आना है, तपस्या या कोठीघर? तो बाबा ने हंसते हुए कहा कि कोठीघर आ जाइए। बाद में बलरामपुर के शंकरगढ़ से लौटने के बाद भूपेश बघेल, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के साथ टीएस बाबा के निवास पर कॉफी पीने भी पहुंचे।

2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भूपेश बघेल मुख्यमंत्री और टीएस सिंहदेव मंत्री, बाद में उपमुख्यमंत्री बने थे। उस दौर में दोनों के बीच नेतृत्व को लेकर मतभेद और कथित ढाई-ढाई साल की व्यवस्था की चर्चाएं चलती थीं। लेकिन अब 2023 में कांग्रेस के सत्ता से बाहर होने और सरगुजा की सभी 14 सीटें हारने के बाद दोनों नेताओं का एक साथ कॉफी पीना संगठन की एकजुटता का बड़ा संदेश माना जा रहा है।

5. 561 करोड़ से 447 करोड़ तक – संपत्ति घटी, छवि बढ़ी

टीएस बाबा के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने जमीन बेचकर राजनीति की है। लगातार संपत्ति घटी है।

• 2013 के चुनाव में: 561 करोड़ 50 लाख की संपत्ति के साथ सबसे अमीर उम्मीदवार। 

• 2018 के चुनाव में: 500 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के साथ प्रदेश के सबसे अमीर विधायक। उस समय उनके पास 5 कार – होंडा सिविक, महिंद्रा XUV, हुंडई वर्ना, ऑडी और मर्सिडीज, एक राइफल, 12 बोर गन, एक पिस्टल भी थी।

• 2023 के चुनाव में: संपत्ति घटकर 447 करोड़ 77 लाख 19 हजार 867 रुपए रह गई। यानी करीब 52 करोड़ 30 लाख रुपए की कमी, जो 10% की गिरावट है। 

सरगुजा राजघराने से होने, कैबिनेट मंत्री रहने और राजनीति का बड़ा चेहरा होने के बावजूद संपत्ति का बढ़ने के बजाय घटना यह साबित करता है कि टीएस बाबा ने अपनी छवि साफ रखी है और उन पर भ्रष्टाचार या किसी घोटाले से जुड़े आरोप नहीं लगे हैं।

6. कौन हैं सरगुजा महाराज टीएस सिंहदेव? पूरी प्रोफाइल

• पूरा नाम: त्रिभुवनेश्वर शरण सिंह देव • जन्म: 31 अक्टूबर 1952 को प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में

• उपाधि: सरगुजा महाराज, टीएस बाबा

• परिवार: पिता मदनेश्वर शरण सिंह देव जो मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं, माता देवेंद्र कुमारी सिंह देव जो मध्यप्रदेश की कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं।

• राजनीतिक सफर: अंबिकापुर से 3 बार लगातार चुनाव जीते, प्रदेश के पहले डिप्टी सीएम और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं।

• विरासत: राजघराने से होने के नाते विरासत में बहुत सी जमीनें और महल मिले।

7. अंबिकापुर के लिए आगे क्या?

सूत्रों के मुताबिक ‘तपस्या’ कोठी की बिक्री से जो राशि आएगी, उसे अंबिकापुर में ही एक नए कॉम्प्लेक्स और होटल प्रोजेक्ट में लगाया जाएगा, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। यानी यह अंत नहीं, बल्कि अंबिकापुर में राजपरिवार के नए निवेश की शुरुआत है।

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