Bilaspur Dry Day News: चकरभाठा में ड्राई डे पर ढाबों में शराबखोरी
बिलासपुर के चकरभाठा में गांधी जयंती पर ड्राई डे की धज्जियां उड़ीं। काली, शुभम और बालाजी ढाबा में शराब बिक्री का वीडियो कैमरे में कैद।

गांधी जयंती पर ड्राई डे की उड़ी धज्जियां! बिलासपुर के चकरभाठा में थाने के सामने ही ढाबों में जाम छलका, पुलिस-आबकारी की गश्त पर उठे सवाल

बिलासपुर रायपुर रोड के काली ढाबा, शुभम ढाबा और बालाजी ढाबा में शराबखोरी का खेल कैमरे में कैद, ड्राई डे पर भी बेखौफ परोसी गई शराब

बिलासपुर / चकरभाठा :- 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर पूरे छत्तीसगढ़ में शुष्क दिवस (Dry Day) घोषित था। शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध था, लेकिन बिलासपुर जिले के चकरभाठा थाना क्षेत्र में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी। छत्तीसगढ़ जनता की आवाज की टीम की पड़ताल में शुष्क दिवस के आदेश की खुलेआम धज्जियां उड़ते हुए पाई गईं।
रायपुर रोड स्थित तीन बड़े ढाबों – काली ढाबा, शुभम ढाबा और बालाजी ढाबा में प्रतिबंध के बावजूद शराब बेचने और पिलाने की गतिविधियां जारी थीं, जिसका पुख्ता वीडियो प्रमाण टीम के पास मौजूद है।
थाने से चंद कदम दूर, काली ढाबा में सबसे बड़ा खेल
सबसे गंभीर मामला चकरभाठा थाने से महज कुछ कदम की दूरी पर स्थित काली ढाबा का है। पड़ताल में सामने आया कि यहां ग्राहकों को ढाबे के अंदर बैठाकर शराब पीने की सुविधा दी जा रही थी। इतना ही नहीं, ढाबे के बाहर खड़ी गाड़ियों में भी मदिरा प्रेमी बेखौफ जाम छलकाते नजर आए। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस ढाबे में गाड़ियों में शराब पिलाने की शिकायत कई बार पुलिस और आबकारी विभाग को दी जा चुकी है। इसके बावजूद काली ढाबा के अंदर और बाहर गाड़ियों में मदिराप्रेमी शराब का लुफ्त बेखौफ उठाते नजर आते रहते हैं।
शटर बंद, धंधा चालू – शुभम ढाबा का नया तरीका
जांच के दौरान शुभम ढाबा का शटर तो बंद मिला, लेकिन कारोबार बंद नहीं था। ढाबे के बाहर एक युवक अपनी स्कूटी से शराब भर कर रखा हुआ था और ग्राहकों को महंगी कीमत पर मुहैया करवाते हुए कैमरे में कैद हुआ है। यह युवक ढाबे का कर्मचारी था या कोई बाहरी युवक, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन शुष्क दिवस पर इस तरह खुलेआम बिक्री होना व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
कार्रवाई के बाद भी बाज नहीं आया बालाजी ढाबा, संचालक के रसूख पर सवाल
बालाजी ढाबा पर तो पहले से ही पुलिस की कार्रवाई हो चुकी है। कुछ दिन पहले ही शराब पिलाए जाने की शिकायत पर चकरभाठा पुलिस ने बिना किसी दबाव में आकर ढाबा संचालक अशोक जोतवानी समेत छह लोगों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई किए जाने का रिकॉर्ड भी उपलब्ध है और सख्त चेतावनी दी थी। इसके बावजूद शुष्क दिवस पर इसी ढाबे के बाहर एक युवक के शराब बेचते हुए कैमरे में कैद होना ढाबा संचालक के रसूख को बयां करने के लिए काफी है। और सवाल उठना स्वाभाविक है कि पिछली कार्रवाई का असर आखिर कितना हुआ?
फैमिली ढाबे की आड़ में नियमों की अनदेखी और हादसों को न्योता
बिलासपुर रायपुर रोड पर देर रात शराबखोरी और सड़क हादसों को लेकर पहले से चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में ढाबों में शराब बेचने या पिलाने की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। हालांकि, किसी ढाबे को विभागीय संरक्षण मिलने का निष्कर्ष ठोस प्रमाण के बिना नहीं निकाला जा सकता। लेकिन बार-बार शिकायतें सामने आने के बावजूद यदि प्रतिबंधित दिन पर ऐसी गतिविधियां जारी थीं, तो संबंधित विभागों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है। परिवार के साथ खाना खाने आने वाले लोगों की आड़ में यदि इस तरह खुलेआम शराबखोरी होगी तो कानून-व्यवस्था का क्या होगा?
आबकारी और पुलिस विभाग से छत्तीसगढ़ जनता की आवाज के सीधे सवाल
इस पूरे मामले के बाद अब गेंद पुलिस और आबकारी विभाग के पाले में है। कानून लागू कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
1. शुष्क दिवस पर चकरभाठा क्षेत्र के ढाबों की कितनी जांच की गई?
2. पूर्व में कार्रवाई के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों की दोबारा जांच हुई या नहीं?
3. कैमरे में कैद बताई जा रही गतिविधियों पर क्या कार्रवाई होगी?
4. क्या पुलिस और आबकारी विभाग संयुक्त जांच कर संबंधित ढाबों के रिकॉर्ड की पड़ताल करेंगे?
निष्कर्ष
सवाल सीधा है—जब प्रतिबंधित दिन पर शराब बिक्री और पिलाने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो कानून लागू कराने की जिम्मेदारी किसकी है? गांधी जयंती पर शराबबंदी केवल आदेश तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अब देखना यह है कि पुलिस और आबकारी विभाग इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करते हैं या मामला भी दूसरी शिकायतों की तरह फाइलों में सिमटकर रह जाता है। और यू ही रात में इस क्षेत्र में स्थित ढाबों में हर दिन शराब की महफिल सजती रहेगी।
यह सिर्फ चकरभाठा क्षेत्र का मामला नहीं बल्कि जिले के अन्य थाना क्षेत्रों में स्थित ढाबे और होटलों में भी यही तस्वीर नजर आती रहती है। और खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग द्वारा कार्यवाही कर जवाबदेही की इतिश्री की जाती रही है। इस पूरे मामले के पुख्ता प्रमाण छत्तीसगढ़ जनता की आवाज के पास सुरक्षित हैं।




