Mungeli /Lormi News:- राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र के गांव में कुएं से मिला शव, 60KM ट्रैक्टर से ले जाना पड़ा
मुंगेली के लोरमी ब्लॉक के सिवलखार गांव में बैगा आदिवासी ढेलऊ बैगा का शव कुएं में मिला। शव वाहन नहीं मिलने से 60 KM तक ट्रैक्टर से लोरमी ले जाना पड़ा।

मुंगेली की बड़ी खबर : राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों के गांव सिवलखार में कुएं से मिला ढेलऊ बैगा का शव, पोस्टमार्टम के लिए 60 KM तक ट्रैक्टर बना शव वाहन सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

मुंगेली / लोरमी / अचानकमार (खुड़िया थाना क्षेत्र) छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। यह पूरा मामला लोरमी विकासखंड के ग्राम पंचायत अचानकमार के आश्रित ग्राम सिवलखार का है, जो राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समाज का गांव है। इस घटना ने शासन-प्रशासन के विकास के तमाम दावों की पोल खोल दी है।

इस खबर की पुष्टि ग्राम पंचायत अचानकमार के उप सरपंच पति द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर हुई है।

तीजा से पहले बेटे को 400 रुपये देकर बाजार भेजा, फिर रहस्यमय हालत में लापता हुए ढेलऊ बैगा
जानकारी के अनुसार सिवलखार निवासी ढेलऊ बैगा मंगलवार शाम से लापता थे। उप सरपंच पति ने बताया कि मंगलवार को ढेलऊ बैगा ने अपने छोटे बेटे मैकू बैगा को अचानकमार साप्ताहिक बाजार जाने के लिए 400 रुपये दिए थे। उन्होंने परिवार से कहा था कि वे शाम की बस से अपनी दो विवाहित बेटियों को तीजा पर्व के लिए ससुराल से लेने जाएंगे। उनके कहने पर परिवार के सभी सदस्य बाजार चले गए और ढेलऊ घर में अकेले रह गए। शाम को जब परिजन बाजार से लौटे तो ढेलऊ घर में नहीं मिले। परिजनों ने सोचा कि वे अपनी बेटियों के ससुराल चले गए होंगे, इसलिए प्रारंभिक स्तर पर ज्यादा खोजबीन नहीं की गई।
दो दिन बाद आंगन के कुएं में मिला शव, गांव में मचा हड़कंप

गुरुवार शाम जब परिजन जंगल से मजदूरी कर लौटे और घर के आंगन में बने कुएं से पानी निकालने गए तो अंदर शव तैरता हुआ दिखाई दिया। नजदीक जाकर पहचान करने पर वह ढेलऊ बैगा का ही शव था। देखते ही देखते पूरे गांव में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना तत्काल खुड़िया थाना पुलिस को दी।

सबसे शर्मनाक मंजर – शव वाहन नहीं मिला, 60 किलोमीटर तक ट्रैक्टर-ट्रॉली से ले जाना पड़ा शव

इस घटना का सबसे दिल दहला देने वाला और शर्मनाक पहलू यह रहा कि शव मिलने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए ले जाने के लिए कोई सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं हुआ। परिजनों ने प्रशासन से शव वाहन और एंबुलेंस की मांग की, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं हो सकी।
आखिरकार मजबूरी में ग्रामीणों को निजी ट्रैक्टर-ट्रॉली का सहारा लेना पड़ा। शुक्रवार सुबह सिवलखार से लोरमी अस्पताल तक लगभग 60 किलोमीटर का लंबा और उबड़-खाबड़ सफर इसी खुले ट्रैक्टर में शव रखकर तय किया गया। 60 किलोमीटर तक ट्रैक्टर में शव ले जाने की यह तस्वीर पूरे मुंगेली जिला प्रशासन की संवेदनहीनता और लचर व्यवस्था को उजागर करती है।
उप सरपंच पति ने कहा – यहां सड़क, एंबुलेंस, शव वाहन कुछ भी नहीं
ग्राम पंचायत अचानकमार के उप सरपंच पति ने बताया कि सिवलखार जैसे अंदरूनी और पहाड़ी गांवों में आज भी पक्की सड़क, स्वास्थ्य केंद्र, एंबुलेंस और शव वाहन जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। उन्होंने कहा कि अचानकमार एक बड़ा क्षेत्र है, यहां कम से कम पोस्टमार्टम की सुविधा होनी चाहिए ताकि ग्रामीणों को 60 किलोमीटर दूर लोरमी तक न भटकना पड़े। सवाल यह भी है कि जब राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले गांव का यह हाल है, तो अन्य दूरस्थ आदिवासी गांवों की स्थिति क्या होगी?
फिलहाल खुड़िया थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई कर मर्ग कायम कर लिया है और मामले की जांच की जा रही है।