कोरबा में दर्दनाक हादसा: पाली के नुनेरा गांव में तालाब में डूबने से तीन मासूम बच्चियों की मौत
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र के नुनेरा गांव में तालाब में डूबने से 3 मासूम सहेलियों की मौत हो गई। गांव में मातम, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल।

कोरबा में तीन मासूमों की तालाब में डूबने से दर्दनाक मौत: नुनेरा गांव में मातम, सुरक्षा के इंतजामों पर उठे गंभीर सवाल

गुरुवार दोपहर स्कूल नहीं गईं थीं तीनों सहेलियां, शाम को तालाब की मेड़ पर मिले कपड़े-चप्पल से हुआ हादसे का खुलासा

कोरबा / पाली :- छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। नुनेरा गांव में तीन छोटी-छोटी बच्चियों की गांव के तालाब में डूबने से मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में तालाबों की सुरक्षा और बच्चों की निगरानी को लेकर बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया है।

कौन थीं वो तीन मासूम?
तीनों मृतक बच्चियां नुनेरा गांव की ही रहने वाली थीं और आपस में पक्की सहेलियां थीं।
1. इंदु अगरिया, उम्र 7 वर्ष, पिता दुर्जन
2. राखी, उम्र 8 वर्ष, पिता मलखम
3. साधना, उम्र 8 वर्ष, पिता सुखसिंह
तीनों कक्षा पहली में पढ़ती थीं और किसान परिवार से आती हैं। घर में गरीबी के बीच पल रही ये बच्चियां रोज साथ खेलती थीं।

कैसे हुआ ये दर्दनाक हादसा?
गुरुवार को तीनों बच्चियां स्कूल नहीं गईं। दिन के समय परिवार के सभी बड़े सदस्य खेतों में काम करने चले गए थे। घर पर कोई निगरानी नहीं थी। इसी दौरान दोपहर के समय तीनों खेलते-खेलते गांव के बाहर स्थित बड़े तालाब की ओर चली गईं।
बताया जा रहा है कि तालाब में पानी ज्यादा था और किनारे फिसलन भरे थे। शाम को जब परिजन काम से लौटे तो तीनों घर पर नहीं मिलीं। परिजनों ने पहले रिश्तेदारों और पड़ोस में तलाश की। जब कहीं पता नहीं चला तो गांव के लोगों को इकट्ठा कर खोजबीन शुरू की गई।
तालाब की मेड़ पर पड़े मिले निशान
तलाश के दौरान जब कुछ ग्रामीण तालाब के पास पहुंचे तो उन्हें मेड़ पर तीन जोड़ी छोटी-छोटी चप्पलें और कपड़े पड़े मिले। इससे अनहोनी की आशंका पक्की हो गई। ग्रामीणों ने तालाब में झांक कर देखा तो पानी में एक शव तैरता हुआ दिखाई दिया।
तुरंत पाली पुलिस को सूचना दी गई।
घंटों चला रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही पाली थाना प्रभारी मनोज कौशिक अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से पहले एक शव को बाहर निकाला गया, जिसकी पहचान इंदु के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस और ग्रामीणों ने तालाब में उतरकर सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
तालाब गहरा होने के कारण काफी मशक्कत करनी पड़ी। आखिरकार देर शाम तक बाकी दोनों बच्चियों राखी और साधना के शव भी बरामद कर लिए गए। तीनों शवों को पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
घटना की खबर फैलते ही मौके पर सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और पूरे गांव में मातम पसर गया।
कोई चश्मदीद नहीं, मौत की असली वजह क्या?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर हुआ क्या था? कुछ खबरों में अंदाजे से लिखा जा रहा है कि एक को बचाने दूसरी कूदी, लेकिन हकीकत यह है कि घटना के वक्त तालाब पर कोई भी मौजूद नहीं था। इसलिए यह पूरी तरह से अटकलबाजी है।
पुलिस भी मान रही है कि इसका कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है। आशंका है कि नहाते समय तीनों एक साथ गहरे पानी में चली गई होंगी या किनारे की फिसलन से उनका पैर फिसल गया होगा। असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
जनहित में बड़े सवाल – प्रशासन कब जागेगा?
1. तालाबों में सुरक्षा क्यों नहीं? गांव के अधिकांश तालाबों के चारों ओर न तो फेंसिंग है, न ही गहराई को लेकर कोई चेतावनी बोर्ड लगा है। बच्चे आसानी से वहां पहुंच जाते हैं।
2. बच्चों की निगरानी का अभाव: खेती-किसानी वाले परिवारों में माता-पिता दिनभर खेतों में रहते हैं, बच्चे घर पर अकेले रह जाते हैं।
3. जागरूकता की कमी: ग्रामीण बच्चों को तैरना नहीं आता और पानी के खतरों का अंदाजा नहीं होता।
पुलिस और प्रशासन क्या कर रहा है?
पाली पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। लेकिन इस घटना ने प्रशासन के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मानसून के बाद भरे हुए तालाबों और खदानों के गड्ढों को सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे?
सभी अभिभावकों से अपील
यह खबर सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि हर माता-पिता के लिए चेतावनी है।
• अपने छोटे बच्चों को कभी भी अकेले तालाब, नदी या गहरे पानी के पास न जाने दें।
• गांव के तालाबों के पास बच्चों का जाना रोकने के लिए निगरानी समिति बनाएं।
• पंचायत को चाहिए कि खतरनाक तालाबों के पास बांस-बल्लियों से अस्थाई घेराबंदी और चेतावनी बोर्ड लगवाए।