बिलासपुर में गौ-संरक्षण के दावों की पोल खुली: पचपेड़ी के ओखर गौशाला में भूख-प्यास से 23 गौवंश की दर्दनाक मौत, वीडियो वायरल
बिलासपुर के पचपेड़ी थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत ओखर में संचालित गौ धाम वासुदेव सेवा समिति में भूख-प्यास से 23 गौवंश की मौत, वीडियो आया सामने। ग्रामीणों में आक्रोश, कलेक्टर से FIR की मांग।

बिलासपुर में गौ-संरक्षण के दावों की पोल खुली: पचपेड़ी के ओखर गौशाला में भूख-प्यास से 23 गौवंश की दर्दनाक मौत, वीडियो वायरल

मस्तूरी तहसील के ग्राम पंचायत ओखर का मामला, शासकीय सहयोग प्राप्त गौ धाम वासुदेव सेवा समिति पर गंभीर लापरवाही का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से उच्चस्तरीय जांच और FIR की मांग की
बिलासपुर पचपेड़ी, छत्तीसगढ़ सरकार की गौ-संरक्षण और गौ-संवर्धन योजनाओं के क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला बिलासपुर जिले से सामने आया है। जिले के मस्तूरी अनुभाग अंतर्गत पचपेड़ी थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत ओखर में संचालित गौशाला में 23 गौवंश की भूख और प्यास से तड़प-तड़पकर मौत का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है।
मृत गौवंश के शव गौशाला परिसर में अस्त-व्यस्त पड़े मिले, जिसका वीडियो ग्रामीणों ने सबूत के तौर पर बनाया है। वीडियो सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत ओखर में बेसहारा और निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए ‘गौ धाम वासुदेव सेवा समिति’ को शासकीय सहयोग से गौशाला संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी। नियमानुसार गौशाला के संचालन, चारा-पानी की व्यवस्था और निगरानी की जिम्मेदारी समिति प्रबंधन के साथ-साथ स्थानीय ग्राम पंचायत की भी है।
आरोप है कि प्रबंधन की घोर लापरवाही के चलते कई दिनों तक गौवंश को न तो पर्याप्त हरा चारा दिया गया और न ही पीने का पानी। भूख-प्यास से व्याकुल होकर बेजुबान गौवंश गौशाला में ही तड़पते रहे और एक-एक कर 23 गौवंश ने दम तोड़ दिया।
ग्रामीणों ने बनाया वीडियो सबूत, उड़े होश
घटना की सूचना मिलते ही जब स्थानीय ग्रामीण और गौ-सेवक मौके पर पहुंचे तो अंदर का मंजर देखकर सभी की रूह कांप गई। गौशाला परिसर में 23 गौवंश मृत अवस्था में पड़े हुए थे, कई शवों में सड़न शुरू हो गई थी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली है, ताकि सबूतों के साथ छेड़छाड़ न हो सके और जिम्मेदारों पर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
अनुदान में भ्रष्टाचार का आरोप, प्रशासन पर सवाल
इस हृदय विदारक घटना के बाद ओखर, पचपेड़ी और पूरे मस्तूरी अंचल में भारी जन-आक्रोश है। ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि जब शासन द्वारा प्रति गौवंश के हिसाब से चारा-पानी और देखरेख के लिए नियमित अनुदान राशि जारी की जाती है, तो वह राशि कहां जा रही है? ग्रामीणों ने इसे सीधे-सीधे भ्रष्टाचार और पशु क्रूरता का मामला बताया है।
कलेक्टर से 4 बड़ी मांगें
आक्रोशित ग्रामीणों, गौ-सेवकों और स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर, जिला बिलासपुर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है:
1. उच्चस्तरीय जांच टीम गठित हो: पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जिला स्तरीय टीम गठित कर जांच कराई जाए।
2. दोषियों पर FIR दर्ज हो: इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार गौशाला समिति के प्रबंधकों और संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत कठोर आपराधिक कार्रवाई की जाए।
3. समिति की मान्यता रद्द हो: लापरवाह ‘गौ धाम वासुदेव सेवा समिति’ की मान्यता तत्काल प्रभाव से निरस्त कर शासकीय अनुदान पर रोक लगाई जाए।
4. शेष गौवंश को बचाया जाए: गौशाला में अभी भी मौजूद बीमार और कमजोर गौवंश को तत्काल अन्य सुरक्षित गौशाला में शिफ्ट कर चारा-पानी और पशु चिकित्सा की समुचित व्यवस्था की जाए।
23 बेजुबानों की यह सामूहिक मौत केवल हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता और निगरानी तंत्र की विफलता को उजागर करती है। अब पूरे जिले की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।