बिलासपुर ब्रेकिंग: बिल्हा में आवारा मवेशियों का आतंक, किसान रात भर जागने को मजबूर
बिलासपुर के बिल्हा ब्लॉक में 2000 से ज्यादा आवारा मवेशियों का कब्जा। उमरिया, बिटकुली, देवकिरारी में किसान परेशान, 40 लाख के गौठान शोपीस बने।

जिला बिलासपुर के अंतर्गत बिल्हा ब्लॉक में ‘मवेशी राज’ – सड़कों पर 2000 से ज्यादा आवारा पशुओं का कब्जा, किसान रात-रात भर जागने को मजबूर

बिलासपुर :- बिल्हा ब्लॉक के अंतर्गत सैकड़ों गांव और ग्राम पंचायतें आती हैं, लेकिन इनमें से कई पंचायतों का हाल देखकर लगता है जैसे यहां विकास की गाड़ी सिर्फ कागजों पर ही दौड़ रही है। सबसे ज्यादा परेशानी अगर कहीं है तो वो है उमरिया, बिटकुली और देवकिरारी ग्राम पंचायत में, जहां ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि यहां ‘ग्राम पंचायत नहीं, सरपंच राज’ चल रहा है।
इन तीन पंचायतों के साथ-साथ महौदा, चकरभाठा, रहंगी, केसला, निपनिया, केवाछी, ढोडकीभाठा, बिल्हा, नवागांव, हथिनी, मुरकुटा, बरतोरी में भी करीब 2000 से ज्यादा आवारा मवेशी सड़कों पर दिन-रात डेरा जमाए बैठे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में खौफ का माहौल है।

जनप्रतिनिधियों को जनता से नहीं, सिर्फ कुर्सी से मतलब
ग्रामीणों का कहना है कि इन पंचायतों के जनप्रतिनिधियों को अपनी जिम्मेदारी से कोई मतलब ही नहीं रह गया है। गाय किसानों की फसल को चर रही है तो चरने दो, बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं तो न जाएं, स्कूल में घुटने भर पानी भरा है तो भरा रहने दो, गांव की सड़क कीचड़ में तब्दील होकर खराब पड़ी है तो पड़ी रहने दो – किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।

जाली भी बेअसर, मिनटों में चट हो रही धान की फसल
इन गांवों में मवेशियों का आतंक इतना है कि किसानों की छोटी-मोटी जालीदार फेंसिंग को ये पल भर में तोड़कर खेत में घुस जाते हैं। धान की लहलहाती फसल को मिनटों में चट कर जाते हैं। किसान रात-रात भर लाठी-टॉर्च लेकर खेत की रखवाली करने को मजबूर हैं। बरसात के मौसम में यह पहरेदारी बेहद जोखिम भरी है – अंधेरे खेत में जहरीले सांप, बिच्छू का खतरा हर कदम पर है।

40-40 लाख के गौठान बने शोपीस
उमरिया, बिटकुली, देवकिरारी और महौदा में शासन के लाखों रुपये, करीब 40-40 लाख की लागत से बने गौठान आज लापरवाही की जीती-जागती मिसाल बन गए हैं। कागजों में गौठान आदर्श हैं, जमीन पर ताला लटका है। न चारा, न पानी, न कर्मचारी।
जनपद CEO से शिकायत, पर कार्रवाई ठंडे बस्ते में
इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि ‘छत्तीसगढ़ जनता की आवाज’ न्यूज़ के संपादक के द्वारा कई बार जनपद पंचायत बिल्हा के सीईओ से ग्राम पंचायत उमरिया, ग्राम पंचायत देवकिरारी और ग्राम पंचायत बिटकुली के सरपंचों की लापरवाही की शिकायत की गई है, इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
खबर पर पक्ष जानने के लिए कई बार ग्राम पंचायत देवकिरारी, उमरिया और बिटकुली के सरपंचों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी ने फोन उठाना उचित नहीं समझा। ग्रामीणों का कहना है कि इन्हें बड़े नेताओं का संरक्षण प्राप्त है।
रोजगार गारंटी सिर्फ कागजों पर, तालाब-नाले की सफाई भगवान भरोसे
हर गांव में तालाब है, लेकिन तालाब की सफाई नहीं हो रही। नाला है तो नाले की सफाई ही नहीं हो रही। रोजगार गारंटी के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसमें सरपंच, रोजगार सहायक, उपसरपंच, पंच सब मिलकर राशि का बंदरबांट कर रहे हैं।
आज स्थिति ऐसी है कि कई ग्राम पंचायत में छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाना भी बंद कर दिए हैं, क्योंकि रोड के नाम पर घुटने से ऊपर तक कीचड़ भरा हुआ है। स्कूल परिसर में भी कीचड़ भरा हुआ है। सब कुछ सिर्फ कागजों तक सीमित रहता है।
अब ग्रामीणों ने दी बड़ी चेतावनी – मुख्यमंत्री तक जाएंगे, फिर होगा उग्र आंदोलन
अब इस पूरे मामले में ग्रामीणों का सब्र टूट गया है। सभी प्रभावित ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों का एक स्वर में कहना है कि “अगर समय रहते आवारा पशुओं के लिए गौठानों में चारा-पानी और रहने की उचित सुविधा नहीं की गई, तो सभी ग्राम पंचायत के ग्रामीण एकजुट होकर माननीय मुख्यमंत्री जी के पास शिकायत लेकर जाएंगे।”
ग्रामीणों ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वहां भी उनकी सुनवाई नहीं होती है, तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जवाबदारी संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच, उपसरपंच, पंच और प्रशासन की होगी।
सिर्फ बिल्हा का ये हाल है, तो पूरे जिले का क्या होगा?
यह हाल तो सिर्फ एक बिल्हा ब्लॉक का है। अब जरा सोचिए कि बिलासपुर जिले के अंतर्गत कुल कितने ब्लॉक हैं और कितनी ग्राम पंचायतें हैं, उनका क्या हाल होगा और कितने हजार आवारा पशु पूरे जिले में घूमते होंगे। शासन-प्रशासन को इस ओर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है, नहीं तो यह छोटी सी लापरवाही एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकती है।




