Bilaspur Crime News: औरापानी डैम संदिग्ध मौत मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही, फोरेंसिक के लिए दिया मोबाइल ड्राइवर 2 महीने चलाता रहा, सबूत डिलीट
बिलासपुर के कोटा थाना क्षेत्र में ऋषभ देव सिंह की संदिग्ध मौत मामले में पुलिस की घोर लापरवाही सामने आई है। फोरेंसिक जांच के लिए जमा किया गया मोबाइल थाने के मुंशी ने अपने ड्राइवर सूरज देवांगन को दे दिया, जिसने 2 महीने तक इस्तेमाल कर सारे सबूत डिलीट कर दिए। परिजन अब IG और SSP से शिकायत करेंगे। ASP मधुलिका सिंह ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है।

बिलासपुर में खाकी पर दाग: हत्या का अहम सबूत फोरेंसिक लैब नहीं, मुंशी के ड्राइवर की जेब में पहुंचा, 2 महीने तक मिटते रहे राज

औरापानी डैम में मिला था बंगालीपारा के ऋषभ देव का शव, हाथ में चश्मा और कलाई पर घड़ी मिलने से परिजन जता रहे हैं हत्या की आशंका

बिलासपुर, छत्तीसगढ़ :- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोटा थाना पुलिस की एक ऐसी लापरवाही सामने आई है जिसने पूरे पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। औरापानी डैम में संदिग्ध परिस्थिति में मिले युवक की मौत के मामले में सबसे अहम इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य यानी मृतक के मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजने की बजाय थाने के मुंशी ने अपने पर्सनल ड्राइवर को दे दिया। ड्राइवर ने पिछले 2 महीनों तक उस मोबाइल का निजी इस्तेमाल किया और उसमें मौजूद सारी कॉल रिकॉर्डिंग और डेटा को डिलीट कर दिया।

मृतक के परिजनों ने इसे घोर लापरवाही नहीं, बल्कि जानबूझकर केस को कमजोर करने और आरोपियों को बचाने की साजिश बताया है।
क्या है औरापानी डैम संदिग्ध मौत का पूरा मामला?
यह मामला सरकंडा थाना क्षेत्र के बंगाली पारा गली नंबर 4 का है। यहां के निवासी ओमप्रकाश सिंह के इकलौते बेटे ऋषभ देव सिंह (32 वर्ष) की 12 जुलाई की रात को उसके दोस्त घर से बुलाकर ले गए थे। अगले दिन 13 जुलाई को उसकी लाश औरापानी डैम में संदिग्ध स्थिति में मिली थी।
मौके पर मिले साक्ष्य हत्या की ओर इशारा कर रहे थे:
1. मृतक के एक हाथ में चश्मा लगा हुआ था।
2. दूसरे हाथ की कलाई पर घड़ी बंधी हुई थी।
3. शरीर पर पानी में डूबने से पहले खुद को बचाने के लिए संघर्ष करने का कोई निशान नहीं मिला था।
इन्हीं कारणों से परिजनों ने इसे सामान्य डूबने की घटना मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई थी।
फोरेंसिक जांच के लिए दिया था मोबाइल, फिर कैसे गायब हो गया?
परिजनों के अनुसार ऋषभ देव की मौत से पहले उसके मोबाइल में कई महत्वपूर्ण कॉल रिकॉर्डिंग थीं, जो इस केस का रुख बदल सकती थीं। इसी को साक्ष्य मानते हुए परिजनों ने फोरेंसिक जांच की मांग की।
22 जुलाई को एसडीओपी नूपुर उपाध्याय ने मृतक की बहन ऋषिका सिंह को एएसपी ऑफिस बुलाया। परिजनों ने भरोसे के साथ मोबाइल एसडीओपी को सौंप दिया। एसडीओपी ने तत्कालीन कोटा थाना प्रभारी प्रशिक्षु डीएसपी आकाश चौधरी को केबिन में बुलाकर निर्देश दिया कि मोबाइल को थाने के मुंशी के माध्यम से संबंधित जांच अधिकारी के जरिए फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाए।
विडंबना देखिए, उसी शाम प्रशिक्षु डीएसपी आकाश चौधरी का तबादला सिरगिट्टी थाना हो गया और इसके बाद से मोबाइल का कोई अता-पता नहीं चला। जब भी परिजन कोटा थाना जाकर मोबाइल के बारे में पूछते, तो पुलिस हर बार नया बहाना बनाकर उन्हें टाल देती थी।
परिजनों ने किया कॉल तो ड्राइवर ने उठाया फोन – ऐसे खुला राज
अफसरों से मदद न मिलने पर 12 सितंबर को परेशान परिजनों ने खुद मृतक के नंबर पर कॉल किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को थाने से बोलने की जानकारी दी। शक होने पर जब परिजन तुरंत कोटा थाना पहुंचे तो सच्चाई सामने आई।
पता चला कि थाने के मुंशी ने फोरेंसिक में भेजने की बजाय मोबाइल अपने निजी ड्राइवर सूरज देवांगन को दे दिया था। परिजनों के थाने पहुंचने पर मुंशी ने आनन-फानन में सूरज देवांगन को बुलाकर मोबाइल वापस करवाया।
2 महीने बाद मिला मोबाइल तो सारा डेटा था डिलीट
मृतक की बहन ऋषिका सिंह ने बताया कि जब 2 महीने बाद मोबाइल वापस मिला तो उसमें मौत से जुड़ी सारी कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य डिलीट हो चुके थे। ड्राइवर द्वारा लगातार इस्तेमाल किए जाने से सारा पुराना डेटा ओवरराइट हो चुका था।
परिजनों का आरोप है कि मोबाइल में मौजूद अहम सबूतों को सोची-समझी साजिश या घोर लापरवाही के चलते नष्ट कर दिया गया है।
अब IG और SSP से न्याय की गुहार लगाएंगे परिजन
इस घटना के बाद परिजनों का पुलिस पर से भरोसा उठ गया है। मृतक की बहन ऋषिका सिंह ने कहा है कि वे इस मामले की शिकायत आज आईजी और एसएसपी बिलासपुर से करेंगी।
परिजनों की 2 बड़ी मांगें:
1. लापरवाही बरतने वाले थाने के मुंशी और अन्य संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए।
2. डिलीट किए गए मोबाइल डेटा की फोरेंसिक रिकवरी कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। मामले पर क्या बोला पुलिस विभाग? ASP मधुलिका सिंह का बयान
मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। इस पूरे मामले पर एएसपी (ग्रामीण) मधुलिका सिंह ने आधिकारिक बयान जारी किया है।
“कोटा थाना के एक संदिग्ध मौत के मामले में फोन को फोरेंसिक भेजने की बजाय पर्सनल ड्राइवर को इस्तेमाल करने के लिए देने का मामला सामने आया है। मामले में जांच के बाद जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
मधुलिका सिंह, एएसपी (ग्रामीण), बिलासपुर
निष्कर्ष: यह मामला बिलासपुर पुलिस की साक्ष्य प्रबंधन प्रणाली पर बड़ा सवाल है। क्या एक थाने के मुंशी को इतना अधिकार है कि वह हत्या जैसे गंभीर मामले के सबूत को अपने ड्राइवर को दे दे? क्या डिलीट हुआ डेटा वापस आ पाएगा? अब सबकी निगाहें IG और SSP की जांच पर टिकी हैं।