Bilaspur Ration Scam: मस्तूरी के कोनी में 222 क्विंटल चावल घोटाला, गरीबों का अनाज बेचने का सरपंच पर आरोप, फूड इंस्पेक्टर भी शक के घेरे में
बिलासपुर जिले के मस्तूरी जनपद की ग्राम पंचायत कोनी में 222 क्विंटल PDS चावल घोटाले का बड़ा मामला। सरपंच राधिका पोर्ते पर गरीबों का राशन बेचने का आरोप, ग्रामीणों ने SDM से की शिकायत, फूड इंस्पेक्टर मंगेश कांत पर संरक्षण का आरोप।

बिलासपुर के मस्तूरी में गरीबों के निवाले पर डाका: कोनी पंचायत में 222 क्विंटल राशन गायब, सरपंच पर बेचने का आरोप, फूड इंस्पेक्टर की भूमिका पर उठे सवाल

मस्तूरी/बिलासपुर।छत्तीसगढ़ में सुशासन का दावा करने वाली सरकार की सबसे बड़ी गरीब कल्याण योजना में ही सेंधमारी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बिलासपुर जिले के मस्तूरी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कोनी में शासकीय उचित मूल्य की दुकान से गरीबों के हक का 222 क्विंटल चावल गायब हो गया है। इस घोटाले के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और सैकड़ों राशन कार्डधारी हितग्राही दाने-दाने के लिए भटकने को मजबूर हैं।
गांव वालों ने इस पूरे खेल का आरोप सीधे ग्राम पंचायत कोनी की सरपंच राधिका पोर्ते पर लगाया है और मस्तूरी SDM कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कर कलेक्टर से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

245 में से 222 क्विंटल चावल माइनस – आखिर गया कहां गरीबों का अनाज?
ग्रामीणों के मुताबिक ग्राम पंचायत कोनी में हर महीने शासन की ओर से लगभग 245 क्विंटल चावल का आवंटन होता है। यह चावल प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत गरीब, बीपीएल और अंत्योदय परिवारों को बांटा जाना था। लेकिन जब ग्रामीणों ने स्टॉक की जांच की तो होश उड़ गए।
राशन दुकान में 245 क्विंटल में से 222 क्विंटल चावल माइनस मिला। यानी गांव के 90% से ज्यादा गरीबों का राशन कागजों में ही गायब कर दिया गया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सरपंच ने मिलीभगत कर इस पूरे राशन को बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया और गरीबों के हक पर डाका डाल दिया।

भुखमरी की कगार पर सैकड़ों परिवार, राशन दुकान पर ताला
राशन गायब होने का सीधा असर गांव के सैकड़ों परिवारों पर पड़ा है। ग्रामीण पिछले 15 दिनों से राशन दुकान के चक्कर काट रहे हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और मजदूर वर्ग सुबह से शाम तक दुकान पर लाइन में खड़े रहते हैं लेकिन उन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा है। कई परिवारों के घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है।

फूड इंस्पेक्टर मंगेश कांत पर भी संरक्षण का गंभीर आरोप – डबल घोटाला?
इस मामले में अब मस्तूरी के खाद्य निरीक्षक मंगेश कांत की भूमिका भी संदिग्ध हो गई है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ता सत्येंद्र जायसवाल ने फूड इंस्पेक्टर पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता ने बताया – “शासन का नियम है कि हर गांव में 5 से 7 तारीख के बीच अनिवार्य रूप से राशन वितरण करना है, लेकिन कोनी में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। फूड इंस्पेक्टर द्वारा सेल्समैन को खुला संरक्षण दिया जा रहा है।”
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने एक-डेढ़ महीने पहले भी इस घोटाले की शिकायत जनपद और खाद्य विभाग से की थी, लेकिन आज तक कोई अधिकारी जांच करने गांव नहीं पहुंचा।
सबसे बड़ा चौंकाने वाला खुलासा यह है कि 222 क्विंटल की कमी को छिपाने के लिए आनन-फानन में फूड इंस्पेक्टर द्वारा 100 क्विंटल अतिरिक्त चावल कोनी भेजा गया है। अब सवाल उठ रहा है कि जब 222 क्विंटल गायब था तो 100 क्विंटल भेजने का क्या औचित्य? क्या यह पर्दा डालने की कोशिश है? इस 100 क्विंटल का पैसा कौन भरेगा? सेल्समैन या यह भी घोटाले का हिस्सा है?
अंगूठा लगाओ, राशन भूल जाओ – एडवांस फिंगरप्रिंट का नया खेल

ग्रामीणों ने वितरण में एक और नए फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में 27-28 तारीख को चावल बांटा गया, लेकिन आधे से ज्यादा हितग्राहियों को चावल दिया ही नहीं गया। आरोप है कि उनसे POS मशीन पर एडवांस में अंगूठा (फिंगर प्रिंट) लगवा लिया गया और कहा गया कि यह अगले महीने का राशन एडवांस में दे रहे हैं।
यानी कागजों में राशन बंट गया, लेकिन हकीकत में गरीबों के थैले खाली रह गए।
प्रशासन से मांग – दोषियों पर हो FIR और बर्खास्तगी
फिलहाल ग्रामीणों और पंचों ने बिलासपुर कलेक्टर और मस्तूरी SDM से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जिला स्तरीय टीम गठित की जाए, PDS दुकान के स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया जाए और दोषी सरपंच, सेल्समैन और संरक्षण देने वाले फूड इंस्पेक्टर पर FIR दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जनपद पंचायत का घेराव करेंगे।