NH-45 बना मौत का दलदल: बिलासपुर-रतनपुर से केंवची तक 95 KM पर सिर्फ गड्ढे, 600 करोड़ का घोटाला?
बिलासपुर संभाग की लाइफलाइन NH-45 पर ग्राउंड जीरो रिपोर्ट। रतनपुर से केंवची तक 95 KM सड़क दलदल में तब्दील, 15 KM लंबा जाम, 600 करोड़ का टेंडर फेल।

एक्सक्लूसिव ग्राउंड जीरो रिपोर्ट: वीडियो और तस्वीरों के साथ बिलासपुर संभाग की लाइफलाइन NH-45 बना 95 KM लंबा मौत का दलदल: 600 करोड़ हजम, सड़क पर सिर्फ कीचड़, गड्ढे और चीखें

रतनपुर से केंवची तक हर मोड़ पर 3-3 फीट के गड्ढे, 15 KM तक लगा जाम, बाइक तक नहीं निकल पा रही
600 करोड़ का टेंडर, डेडलाइन फेल, फिर भी अफसर मौज में: इंजीनियरों पर क्यों नहीं FIR? NHAI और ठेकेदार की मिलीभगत पर प्रशासन मौन क्यों?
बिलासपुर | रतनपुर | पेंड्रा-गौरेला-मरवाही | 16 अगस्त 2026 :- छत्तीसगढ़ को मध्यप्रदेश से जोड़ने वाला नेशनल हाईवे-45 अब हाईवे नहीं, नरक का रास्ता बन चुका है। रतनपुर से केंवची तक 95 किलोमीटर के पूरे स्ट्रेच पर सड़क गायब है, बचा है तो सिर्फ घुटने भर कीचड़, जानलेवा गड्ढे और रोज़ का 10-10 किलोमीटर लंबा जाम।
हमारी टीम ने जब चौरा, पुड़ू, मझवानी, चपोरा, डाल सागर, और केंवची तक ग्राउंड पर जाकर देखा तो तस्वीर रोंगटे खड़े करने वाली थी। ट्रक अपने पहिए तक दलदल में धंस गए हैं, कारें ट्रैक्टर से खिंचवाई जा रही हैं, और बाइक सवार जान हथेली पर लेकर निकल रहे हैं।
पहले 20 ट्रक, अब 2000 ट्रकों का बोझ – सड़क ने दम तोड़ दिया
स्थानीय लोगों ने बताया, पहले इस रास्ते पर दिन में 10-20 ट्रक ही चलते थे। अब कोटा-बिलासपुर इंडस्ट्रियल बेल्ट और कोयला परिवहन के चलते हजारों भारी मालवाहक, सरिया-कोयला लदे ट्रक इसी कच्चे रास्ते से गुजर रहे हैं। अधूरी, बिना बेस की सड़क ये लोड झेल नहीं पा रही। रोज़ एक ट्रक फंसता है और पूरा संभाग जाम हो जाता है। शुक्रवार को चौरा-पुड़ू के पास 15 KM लंबा जाम लगा, लोग 6 घंटे तक फंसे रहे।
सबसे बड़ा पाप – बच्चों और मरीजों की जान से खिलवाड़
इस एक सड़क से रोज़ सैकड़ों स्कूल बसें और एंबुलेंस गुजरती हैं। जाम में 4-4 घंटे तक छोटे-छोटे बच्चे बस में कैद, भूखे-प्यासे रोते-बिलखते हैं। टीचरों को मजबूरन बच्चों को गोद में लेकर, स्कूल बैग सिर पर रखकर घुटने भर कीचड़ में पैदल पार कराना पड़ रहा है।
सोचिए, अगर इसी जाम में किसी गर्भवती महिला की एंबुलेंस या हार्ट अटैक के मरीज की गाड़ी फंस जाए तो जिम्मेदार कौन होगा? क्या NHAI के अफसर उसकी मौत का जवाब देंगे?
600 करोड़ का खेल: डेडलाइन जनवरी 2026 थी, आज तक मिट्टी के ढेर
केंद्र सरकार ने इस 95 KM के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 600 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट पास किया। कागजों में डेडलाइन जनवरी 2026 थी। लेकिन हकीकत ये है कि 70% काम आज भी अधूरा है।
न तो पानी निकासी के लिए नाली है, न डायवर्सन रोड। दोनों तरफ मिट्टी के पहाड़ खड़े कर दिए गए हैं, जो बारिश में बहकर पूरी सड़क को दलदल बना रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल – शासन-प्रशासन मौन क्यों है?
जनता पूछ रही है –
1. जब निजी जमीन का अधिग्रहण ही नहीं हुआ था, तो 600 करोड़ का टेंडर क्यों बांटा गया? ये किसकी लापरवाही है?
2. NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर, साइट इंजीनियर, ठेकेदार कंपनी के सुपरवाइजर रोज़ साइट पर क्यों नहीं आते? सिर्फ AC दफ्तर में बैठकर रिपोर्ट क्यों बन रही है?
3. इतनी बड़ी लापरवाही पर आज तक किसी इंजीनियर पर सस्पेंशन, किसी ठेकेदार पर ब्लैकलिस्ट या FIR क्यों नहीं हुई? विभाग का एक ही रटा-रटाया जवाब है – “प्रस्ताव दिल्ली भेजा है, जमीन नहीं मिली।” क्या जनता इसी बहाने से जान देती रहेगी?
सूत्र बताते हैं कि ठेकेदार और अफसरों की मिलीभगत से बिना काम के भी बिल निकालने का खेल चल रहा है। अगर इसकी स्वतंत्र जांच हो जाए तो कई बड़े चेहरे बेनकाब होंगे।
जनता की चेतावनी नहीं, आखिरी मांग
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और बिलासपुर के हजारों व्यापारी, छात्र, किसान, नौकरीपेशा लोगों की सिर्फ 3 मांगें हैं –
1. तत्काल राहत: रतनपुर से केंवची तक जेसीबी, मुरम और गिट्टी डालकर गड्ढों को 48 घंटे में भरकर चलने लायक बनाया जाए।
2. भारी वाहनों पर रोक: जब तक सड़क नहीं बनती, कोयला-सरिया वाले भारी वाहनों के लिए रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक की टाइमिंग तय हो या वैकल्पिक मार्ग दिया जाए।
3. जवाबदेही तय हो: NHAI के अफसरों की रोजाना मॉनिटरिंग की रिपोर्ट सार्वजनिक हो और काम में लेटलतीफी पर ठेकेदार कंपनी और जिम्मेदार इंजीनियरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और FIR दर्ज हो।




