मुंगेली लोरमी न्यूज़: अचानकमार टाइगर रिजर्व में लमनी वन ग्राम के बच्चों को मिली शिक्षा किट, बांधवगढ़ से आएंगी 3 बाघिनें
मुंगेली जिले के लोरमी वन परिक्षेत्र के लमनी वन ग्राम में जीवधर्णी फाउंडेशन ने बच्चों को शिक्षा सामग्री बांटी। अचानकमार टाइगर रिजर्व में बांधवगढ़ से 3 बाघिनें लाने की तैयारी तेज।

मुंगेली के अचानकमार टाइगर रिजर्व में दोहरी खुशी: लमनी वन ग्राम के बच्चों को मिली शिक्षा किट, बांधवगढ़ से आएंगी 3 बाघिनें, तीन जिलों में बढ़ेगा पर्यटन

स्थान: वन ग्राम लमनी, लोरमी वन परिक्षेत्र, जिला मुंगेली (छत्तीसगढ़)
मुंगेली / लोरमी – छत्तीसगढ़ जनता की आवाज न्यूज़। छत्तीसगढ़ के हृदय स्थल कहे जाने वाले अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) से इस वक्त की दो सबसे बड़ी खबरें सामने आ रही हैं, जिनका सीधा सरोकार मुंगेली, बिलासपुर और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिलों की जनता से है। बता दें कि लोरमी, मुंगेली जिले की ही एक तहसील और वन परिक्षेत्र है, जो अचानकमार का मुख्य प्रवेश द्वार है।
एक तरफ जहां रिजर्व के कोर जोन में बसे आदिवासी वन ग्राम में शिक्षा की अलख जगाई गई है, वहीं दूसरी तरफ जंगल में बाघों के कुनबे को बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है।

पहली बड़ी खबर: वन ग्राम लमनी में शिक्षा जागरूकता अभियान कोर एरिया के बच्चों तक पहुंची मदद
जिला मुंगेली के लोरमी वन परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाले अति संवेदनशील कोर एरिया में स्थित है वन ग्राम लमनी। यहां आज भी सड़क, बिजली और शिक्षा की सुविधाएं सीमित हैं। इसी गांव की प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला में जीवधर्णी फाउंडेशन द्वारा एक विशेष शिक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
बच्चों को क्या-क्या बांटा गया?
फाउंडेशन की टीम ने यहां के गरीब आदिवासी बच्चों को पेन, कॉपी, किताब, पेंसिल, रबर और ज्योमेट्री बॉक्स से भरी पूरी एजुकेशन किट उपहार स्वरूप भेंट की। फाउंडेशन का एक ही उद्देश्य है – जंगल में रहने वाला हर बच्चा शिक्षित बने और देश का जिम्मेदार नागरिक बने।
बच्चों ने लिया स्नातक तक पढ़ने का संकल्प
कार्यक्रम में बच्चों को सिर्फ 8वीं तक नहीं, बल्कि स्नातक (Graduation) तक शिक्षा पूरी करने और शिक्षित व सक्षम बनकर अपने गांव के दूसरे बच्चों को भी प्रेरित करने का संकल्प दिलाया गया।
डॉ. प्रभुदत्त खेड़ा की कर्मभूमि है लमनी
इस कार्यक्रम का एक भावुक पहलू भी रहा। यह लमनी क्षेत्र छत्तीसगढ़ में शिक्षा के महानायक कहे जाने वाले स्वर्गीय डॉ. प्रभुदत्त खेड़ा की कर्मभूमि है। फाउंडेशन के सदस्यों ने उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार बनी समाधि स्थल पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर जीवधर्णी फाउंडेशन के विकास चंद्र वर्मा, रामचरण यादव, शाला के प्रधान पाठक फिलिप तिर्की, सहायक शिक्षक और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

दूसरी बड़ी खबर: अचानकमार में फिर गूंजेगी बाघों की दहाड़, बांधवगढ़ से आएंगी 3 बाघिनें नवंबर में होगा बाघिनों का चयन
अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या और आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से 3 बाघिनों को लाने की योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने खुद इस बात की पुष्टि की है।
मानसून सीजन खत्म होने के बाद नवंबर 2024 में वन विभाग के अधिकारियों की एक विशेष टीम बांधवगढ़ जाएगी और वहां स्वस्थ बाघिनों का चयन करेगी।
इस रूट से लाई जाएंगी बाघिनें
इन तीनों बाघिनों को सड़क मार्ग से कटनी – जबलपुर – बिलासपुर होते हुए लोरमी वन परिक्षेत्र के रास्ते अचानकमार टाइगर रिजर्व लाया जाएगा।
तीन जिलों को क्या होगा फायदा?
यह खबर सिर्फ जंगल की नहीं, बल्कि मुंगेली, बिलासपुर और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) तीनों जिलों के लिए रोजगार और पर्यटन से जुड़ी है। अचानकमार में बाघों की संख्या बढ़ने से शिवतराई, लोरमी और अचानकमार में टूरिस्टों की संख्या बढ़ेगी, जिससे स्थानीय होटल, गाइड और आदिवासी युवाओं को सीधा रोजगार मिलेगा।
पहले बाड़े में रखा जाएगा, फिर जंगल में छोड़ा जाएगा
सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत बाघिनों को सीधे खुले जंगल में नहीं छोड़ा जाएगा। पहले कुछ हफ्तों तक उन्हें एक बड़े, सुरक्षित और खुले बाड़े (Enclosure) में रखा जाएगा। जब वे यहां के वातावरण में ढल जाएंगी, तो उनके गले में अत्याधुनिक रेडियो कॉलर (Radio Collar) लगाकर खुले जंगल में रिहा किया जाएगा, ताकि उनकी लोकेशन और मूवमेंट पर 24 घंटे नजर रखी जा सके।
इस पूरी योजना को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और छत्तीसगढ़ राज्य सरकार से मंजूरी मिल चुकी है।
914 वर्ग किमी में फैला है अचानकमार, अभी 35 बाघ मौजूद
जानकारी के मुताबिक अचानकमार टाइगर रिजर्व 914.018 वर्ग किलोमीटर में फैला है। NTCA के नियम अनुसार हर 4 साल में बाघों की गिनती होती है। 2022 की गिनती में यहां 18 बाघ मिले थे, लेकिन वर्तमान में वन विभाग के अनुसार यहां लगभग 35 बाघ विचरण कर रहे हैं। 3 नई बाघिनों के आने के बाद इस संख्या में तेजी से इजाफा होने की उम्मीद है।


