Bilaspur Breaking:-बिलासपुर के गतौरा में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा कंकालीन पुल, एक साल से अधूरा निर्माण, अरुणा सूर्या ने खोला मोर्चा
बिलासपुर के गतौरा में कंकालीन पुल एक साल से अधूरा, गुणवत्ता पर सवाल। 10 टन की सड़क पर 70 टन के ट्रक, सभापति अरुणा सूर्या ने जल संसाधन विभाग को घेरा।

बिलासपुर के गतौरा में भ्रष्टाचार का ‘कंकाल’ बना कंकालीन पुल! सालभर से अधूरा पड़ा निर्माण, 10 टन की सड़क पर दौड़ रहे 70 टन के मौत के ट्रक; जिला पंचायत सभापति अरुणा सूर्या ने जल संसाधन विभाग को घेरा

बिलासपुर / मस्तूरी-गतौरा :- बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र अंतर्गत गतौरा में बन रहा कंकालीन पुल पिछले करीब एक साल से धीमी गति से निर्माणाधीन है। निर्माण कार्य की रफ्तार के साथ-साथ इसकी गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कथित लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते पुल निर्माण प्रभावित हो रहा है और सरकारी राशि का सदुपयोग होने के बजाय निर्माण कार्य अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ रहा है।
पुल का निर्माण लंबे समय से अधूरा पड़ा है। दूसरी ओर क्षेत्र से भारी वाहनों की आवाजाही जारी रहने के कारण नहर मार्ग और आसपास की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया और भारी वाहनों पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सभापति अरुणा सूर्या ने अधिकारियों को घेरा

जिला पंचायत बिलासपुर की सभापति अरुणा चंद्रप्रकाश सूर्या ने मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने भारी वाहनों की आवाजाही रोकने, क्षतिग्रस्त मार्ग को तत्काल दुरुस्त कराने तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि PMGSY से निर्मित ग्रामीण सड़कों की भार क्षमता करीब 10-15 टन है, जबकि इन मार्गों पर 60-70 टन तक के भारी वाहनों के चलने की बात सामने आई है। इससे सड़क और नहर मार्ग को नुकसान पहुंच रहा है।
जनहित पर दोहरी मार: पुल अधूरा, सड़कें चकनाचूर


इस पुल के निर्माण में हो रही देरी का सबसे बड़ा दुष्परिणाम क्षेत्र की सड़कों पर पड़ रहा है। पुल का वैकल्पिक मार्ग न होने से नहर के सर्विस मार्ग और PMGSY योजना से बनी ग्रामीण सड़कों पर भारी-भरकम वाहनों का रेला चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिन सड़कों की भार क्षमता महज 10 से 15 टन है, उन पर 60 से 70 टन वजनी रेत, गिट्टी, सीमेंट और राखड़ से लदे हाइवा और ट्रेलर दिन-रात दौड़ रहे हैं। नहर किनारे का पूरा मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। ग्रामीण सड़कें टूटकर धूल के गुबार में बदल गई हैं।
पुल निर्माण की गुणवत्ता और खर्च की जांच की मांग
ग्रामीणों ने निर्माणाधीन पुल की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, कार्य की प्रगति, स्वीकृत लागत और अब तक किए गए भुगतान की भी जांच होनी चाहिए। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों पर लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही इसकी वास्तविकता सामने आएगी। ऐसे में सवाल यह है कि सालभर से कछुए की चाल चल रहे इस निर्माण कार्य पर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कब गंभीरता दिखाएंगे?
ग्रामीणों ने मांग की है कि पुल निर्माण की स्वतंत्र एजेंसी से तकनीकी गुणवत्ता जांच कराई जाए, स्वीकृत लागत और ठेकेदार को किए गए भुगतान की पूरी ऑडिट हो और कार्य में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर कार्रवाई हो।
अब बड़ा सवाल—कब पूरा होगा पुल?
एक तरफ ग्रामीणों को आवागमन की परेशानी झेलनी पड़ रही है, दूसरी तरफ निर्माणाधीन पुल की धीमी गति और गुणवत्ता को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। सभापति अरुणा सूर्या की शिकायत के बाद अब देखना यह है कि जल संसाधन विभाग इस मामले में जांच और कार्रवाई करता है या फिर गतौरा का कंकालीन पुल इसी तरह वर्षों तक अधूरा पड़ा रहेगा।
फिलहाल ग्रामीणों की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है।




