बिलासपुर उत्तरी बाईपास पर बड़ा फैसला: 8 गांवों की 644 खसरा जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक, कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जारी किया आदेश
बिलासपुर में NH-130 पर प्रस्तावित 20.921 किमी लंबे 4-लेन उत्तरी बाईपास के लिए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने 8 गांवों - सेंदरी, रमतला, बिरकोना, नगोई, बिजोर, मोपका, दोमुहानी और ढेंका की 644 खसरा जमीन के क्रय-विक्रय और विभाजन पर रोक लगा दी है। जानिए पूरा आदेश।

बिलासपुर उत्तरी बाईपास को लेकर कलेक्टर का बड़ा आदेश, 8 गांवों की जमीन की खरीदी-बिक्री पर लगी रोक

बिलासपुर, 1 सितंबर 2026 :- राष्ट्रीय राजमार्ग-130 पर प्रस्तावित बिलासपुर उत्तरी बाईपास परियोजना को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने बाईपास के एलाइनमेंट में आने वाली भूमि के क्रय-विक्रय, बंटवारा और डायवर्सन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध अंतिम भू-अधिग्रहण पूरा होने और शासन की अंतिम अधिसूचना जारी होने तक लागू रहेगा।
यह फैसला NHAI की महत्वाकांक्षी परियोजना में गड़बड़ियों और जमीन की कीमतों में कृत्रिम बढ़ोतरी को रोकने के लिए लिया गया है।
किन 8 गांवों की जमीन पर लगी रोक?
कलेक्टर कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, बिलासपुर उत्तरी बाईपास के किलोमीटर 0.000 से किलोमीटर 20.921 तक के दायरे में यह प्रतिबंध लागू होगा। इसके अंतर्गत बिलासपुर जिले के कुल 8 ग्रामों की 644 खसरों की भूमि को चिन्हित किया गया है।
प्रभावित गांव इस प्रकार हैं:
1. सेंदरी
2. रमतला
3. बिरकोना
4. नगोई
5. बिजोर
6. मोपका
7. दोमुहानी
8. ढेंका
इन सभी गांवों में राजस्व विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार के नामांतरण, बटांकन, विक्रय पत्र का पंजीयन न किया जाए।
क्यों लगाना पड़ा प्रतिबंध? NHAI ने जताई थी आशंका
परियोजना निदेशक, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), परियोजना कार्यान्वयन इकाई बिलासपुर ने कलेक्टर को पत्र लिखकर इस प्रतिबंध की मांग की थी।
NHAI को आशंका थी कि भू-अधिग्रहण की सूचना लीक होने के बाद कुछ लोग एलाइनमेंट क्षेत्र में सस्ती जमीन खरीदकर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में बेच सकते हैं। इससे न सिर्फ परियोजना की लागत कई गुना बढ़ जाएगी, बल्कि असली भूमि स्वामियों को भी नुकसान होगा और सरकार को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी।
शासन के निर्देश पर हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई केवल NHAI के अनुरोध पर ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 14 अक्टूबर 2024 को जारी निर्देशों के परिपालन में भी की गई है। शासन ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी भू-अर्जन प्रक्रिया के अधीन आने वाली भूमि के अंतरण, बटांकन, व्यपवर्तन और क्रय-विक्रय को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाए।
इसका मुख्य उद्देश्य है:
• भू-अर्जन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और पारदर्शी रखना।
• मूल भूमि स्वामियों के हितों की रक्षा करना।
• शासकीय धन के दुरुपयोग को रोकना। क्या है बिलासपुर उत्तरी बाईपास परियोजना?
प्रस्तावित बिलासपुर उत्तरी बाईपास राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-130 पर एक महत्वपूर्ण परियोजना है। यह लगभग 20.921 किलोमीटर लंबा 4-लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर होगा।
इस बाईपास के बनने से बिलासपुर शहर के अंदर भारी वाहनों का दबाव कम होगा, ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी और रायपुर-सीपत-कोरबा मार्ग पर आवागमन सुगम होगा। यह परियोजना बिलासपुर के औद्योगिक और लॉजिस्टिक विकास के लिए भी मील का पत्थर साबित होगी।
आदेश का उल्लंघन करने पर क्या होगी कार्रवाई?
कलेक्टर के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध अवधि के दौरान किया गया किसी भी प्रकार का अवैध क्रय-विक्रय, बंटवारा या डायवर्सन शून्य माना जाएगा और उसका भू-अधिग्रहण मुआवजा निर्धारण में कोई आधार नहीं होगा। संबंधित पक्षों के खिलाफ राजस्व संहिता के तहत वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी।
जिला प्रशासन ने सभी पटवारियों, तहसीलदारों और पंजीयन कार्यालय को इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।