गांव पड़ी से बिलासपुर तक: छवि पटेल की PSC सक्सेस स्टोरी
ओडिशा बॉर्डर के गांव पड़ी से बिलासपुर के सहायक आबकारी अधिकारी बने छवि पटेल की प्रेरक कहानी। 12 घंटे की पुलिस ट्रेनिंग के बीच लाइब्रेरी में पढ़कर क्रैक किया PSC।

गांव पड़ी से बिलासपुर तक: 12 घंटे की पुलिस ट्रेनिंग के बीच लाइब्रेरी में पढ़कर PSC क्रैक करने वाले अफसर छवि पटेल की प्रेरक कहानी

बिलासपुर/रायगढ़। अगर हौसला बुलंद हो तो ओडिशा बॉर्डर के छोटे से गांव से निकलकर भी बिलासपुर जैसे बड़े शहर में अफसर बना जा सकता है। बिलासपुर के सहायक जिला आबकारी अधिकारी छवि पटेल की कहानी CGPSC की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए किसी मोटिवेशन से कम नहीं है।
मूल रूप से रायगढ़ जिले के पुसौर तहसील के ग्राम पड़ी के रहने वाले छवि पटेल ने एक विशेष बातचीत में अपने संघर्ष से लेकर सफलता तक का सफर साझा किया।
पिता के एक वाक्य ने बदली जिंदगी – छवि पटेल का शुरुआती जीवन
छवि पटेल पांच सदस्यीय परिवार से आते हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनके पिताजी का स्वर्गवास हुआ है। उनका पूरा जीवन पिता के एक वाक्य पर टिका रहा – “बेटा तुमको पढ़ाई करना है।”
शिक्षा का सफर आसान नहीं था। मिडिल की पढ़ाई के लिए गांव पड़ी से 8-10 किमी दूर तहसील जाना, 12वीं रायगढ़ से और कॉलेज भिलाई से पूरी करना। संसाधनों की कमी के बावजूद उनके पिता ने उन्हें पढ़ाया। वे कहते हैं, “आज मैं बिलासपुर में आबकारी अधिकारी के पद पर हूं, तो सिर्फ पिताजी के त्याग से हूं।”
वर्दी का जुनून: पुलिस ट्रेनिंग और लाइब्रेरी में PSC की तैयारी
छवि पटेल की सक्सेस स्टोरी का सबसे मजबूत हिस्सा यहीं है। बचपन से वर्दी का जुनून था। पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ पुलिस सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा पास की।
चंदखुरी में लगभग 2 साल की ट्रेनिंग हुई। पुलिस ट्रेनिंग का समय सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक, यानी 12 घंटे होता है। पूरे दिन परेड, पीटी और क्लास। इसी थका देने वाली दिनचर्या के बीच उन्होंने लाइब्रेरी में समय निकालकर CGPSC / PSC की तैयारी की और आबकारी सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा क्रैक कर ली।
अब छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग की ट्रेनिंग पैटर्न बदल गया है। पहले ट्रेनिंग ग्वालियर MP में होती थी, अब 2 से 3 साल की ट्रेनिंग जिला आबकारी अधिकारी के मार्गदर्शन में होती है, जिसमें डिस्टलरी, वेयरहाउस, सर्किल और बॉटलिंग प्लांट की ट्रेनिंग दी जाती है।
बिलासपुर आबकारी विभाग का राजस्व मॉडल क्या है?
बहुत लोग पूछते हैं कि आबकारी विभाग का काम क्या है? इस पर सहायक जिला आबकारी अधिकारी छवि पटेल ने साफ कहा –
“हमारा मूल कार्य दो है – राजस्व जनरेट करना और अवैध शराब पर कंट्रोल करना। छत्तीसगढ़ में सरकार खुद एक निगम के माध्यम से शराब बेच रही है। शासकीय दुकानों से मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी ही सबसे बड़ा राजस्व है। हमारा टारगेट है शासकीय बिक्री बढ़े और कच्ची शराब की बिक्री रुके।”
पहली पोस्टिंग सरगुजा में, शक्ति में 26 जनवरी को मिला सम्मान
छवि पटेल की पहली पोस्टिंग वनांचल जिला सरगुजा में हुई। यह शेड्यूल एरिया है, जहां 5 लीटर तक महुआ शराब रखने की छूट है। इससे सरकारी राजस्व पर असर पड़ता है।
इसके बाद वे शक्ति जिले में पदस्थ रहे। यहां ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची शराब सबसे बड़ी समस्या थी। उन्होंने बताया कि सस्ती होने के कारण लोग उसी ओर जाते हैं। उन्होंने शक्ति में सबसे ज्यादा गैर-जमानती प्रकरण कायम किए, जिसके लिए उन्हें 26 जनवरी को जिला प्रशासन शक्ति द्वारा सम्मानित किया गया।
बिलासपुर में क्यों खतरनाक है कच्ची शराब? अधिकारी ने दी चेतावनी
कच्ची शराब क्यों जानलेवा है? इस सवाल पर अधिकारी ने कहा, “सरकारी शराब मानक और केमिकल फॉर्मूले से बनती है, लैब टेस्टेड होती है। लेकिन कच्ची महुआ शराब बिना मानक के, गंदे पानी और यूरिया जैसी मिलावट से बनती है। यह लीवर को सड़ा देती है। एमपी के सागर में हुई घटना इसका उदाहरण है।”
उन्होंने अपील की – शासकीय दुकान से ही शराब लें, Drink and Drive न करें और कच्ची शराब की सूचना आबकारी विभाग को दें।
बिलासपुर जैसे बड़े शहर में 18 घंटे की ड्यूटी
पिछले 3 साल से बिलासपुर में आबकारी अधिकारी के रूप में पदस्थ श्री पटेल ने बताया कि बड़े शहर की चुनौती अलग है। सुबह 6 बजे से अवैध शराब की कार्रवाई और रात 12 बजे तक बार-क्लब चेकिंग। एक आबकारी निरीक्षक की दिनचर्या सुबह 9:30 बजे दुकान वॉच करने से शुरू होती है। बार मालिक संसाधन संपन्न होते हैं, इसलिए दबाव भी रहता है।
उन्होंने कहा, “सुदूर गांव में मुखबिर के सहारे जाकर आरोपी को अरेस्ट कर गांव से बाहर निकालना सबसे बड़ा चैलेंज है। कई बार टीम पर हमले भी होते हैं।”
CGPSC की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए छवि पटेल के टिप्स
CGPSC Preparation Tips देते हुए उन्होंने कहा, “लगन, निष्ठा और मेहनत से पढ़ाई करो। सफलता में देर हो सकती है पर मिलेगी जरूर। हमारे पास सिर्फ किताब थी, आपके पास मोबाइल, इंटरनेट और AI जैसे हथियार हैं। इसका सही उपयोग करो।”
परिवार पर उन्होंने कहा, “एक शादीशुदा व्यक्ति के जीवन में मां और पत्नी का सबसे बड़ा रोल होता है। मुझे मेरी पत्नी का बहुत सहयोग मिलता है।”