Bilaspur Breaking:-बिलासपुर मस्तूरी पाराघाट में राशि स्टील प्लांट पर 117 एकड़ जमीन हड़पने का आरोप, किसानों ने कलेक्टर से लगाई गुहार
बिलासपुर जिले के मस्तूरी तहसील के पाराघाट में राशि स्टील एंड पावर प्लांट पर 40 किसान परिवारों को नौकरी का झांसा देकर जमीन लेने, 117 एकड़ जमीन की कूटरचना कर बिक्री और शासकीय खसरा नंबर 170 में फर्जीवाड़े का आरोप, कलेक्टर से जांच की मांग।

बिलासपुर के मस्तूरी पाराघाट में 117 एकड़ जमीन पर बड़ा खेल, राशि स्टील प्लांट पर किसानों की जमीन हड़पने का गंभीर आरोप

बिलासपुर/मस्तूरी (पाराघाट, बेलटुकरी, भनेशर, मनेसर) – ग्राम पंचायत पाराघाट में स्थित राशि स्टील एवं पावर लिमिटेड कंपनी के खिलाफ लगभग 40 किसान परिवारों ने 31/08/2026 को कलेक्टर महोदय जिला बिलासपुर को 3 अलग-अलग आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। आवेदन समस्त कृषकगण और समस्त ग्रामवासी पाराघाट, मनेसर, बेलटुकरी की ओर से जिला कांग्रेस कमेटी बिलासपुर ग्रामीण अध्यक्ष महेन्द्र गंगोत्री द्वारा दिया गया है।

40 किसान परिवारों को नौकरी और मुआवजे का लालच देकर मुकरने पर कार्यवाही की मांग
ग्राम पंचायत पाराघाट में राशि स्टील एवं पावर लिमिटेड कंपनी स्थित है जिसमें कि लगभग 40 किसानों परिवारों जो कि ग्राम पाराघाट बेलटुकरी एवं भनेशर में हैं जिनसे उनकी भूमि नौकरी व पुनर्वास का लालच देकर प्लांट स्थापित कर दिया गया है। उक्त किसानों परिवार के द्वारा प्लांट गेट के पास बातचीत करने के लिये जाया जाता है तो उनको बलपूर्वक एवं पुलिस प्रशासन की धमकी एवं मस्तूरी थाना से पुलिस गाड़ी बुलाकर जबरदस्ती प्रतिबंधात्मक धाराएं लगायी जाती है जिसके कारण किसानों से विश्वास उठ रहा है क्योंकि पुलिस वाले प्लांट के साथ मिलकर अनावश्यक रूप से किसान परिवारों को डरे सहमें एवं भयभीत कर रहे हैं। किसानों ने लगभग 40 किसान परिवार के तत्काल नौकरी एवं पुनर्वास योजना का लाभ दिलाने हेतु राशि पावर प्लांट पाराघाट को निर्देशित करने की कृपा करने की मांग की है।
117 एकड़ जमीन वसुंधरा से राशि को बेचने का आरोप – जमीन वापस कराने की मांग
ग्राम पाराघाट बेलटुकरी एवं भनेशर तहसील मस्तूरी जिला बिलासपुर छ.ग. में स्थित हम सभी किसानों की कृषि भूमि में वसुंधरा पावर प्लांट के द्वारा नौकरी एवं पुनर्वास का लालच देकर सन् 2003 से 2009 तक खरीदी किया गया किन्तु उक्त वसुंधरा पावर प्लांट द्वारा कोई प्लांट नहीं लगाया गया कृषि भूमि को खराब कर दिया गया। उक्त सभी भूमि लगभग 117 एकड़ को 12-13 वर्षों पश्चात् कूट रचना करके राशि पावर प्लांट पाराघाट को 2022 को बिक्री कर दिया गया। इस संबंध में किसानों के बीच चिंता एवं असंतोष है।
किसानों ने 6 बिंदुओं पर जांच की मांग की है – किसानों से किस उद्देश्य एवं किन शर्तों पर खरीदी की गई थी, भूमि खरीदने वाली कंपनी द्वारा प्रस्तावित पावर प्लांट की स्थापना के लिए स्वीकृत, लगभग 12 वर्षों तक प्लांट क्यों स्थापित नहीं किया गया, भूमि वर्तमान में क्यों कंपनी के नाम पर दर्ज है उसे किस आधार पर दूसरों प्लांट कंपनी भेजा गया, क्या भूमि को दूसरे उद्देश्य या प्लांट कंपनी को हस्तांतरित या बेचने हेतु सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमति दी गई है, भूमि खरीदी के समय किसानों से किये गये वादे समझौते एवं संबंधित शर्तों का पालन हुआ है कि नहीं। छ.ग. भू-राजस्व संहिता एवं उद्योग नीति के अनुसार लगभग 12 वर्ष एवं प्लांट कंपनी की स्थापना नहीं होने के कारण समस्त 117 एकड़ भूमियों के सभी किसानों को क्षतिपूर्ति के साथ वापस दिलाने की कृपा करने की मांग की है।
शासकीय भूमि खसरा नं. 170 रकबा 10.21 एकड़ को कूटरचना कर प्लांट के नाम पर करने का आरोप
ग्राम पंचायत मनेसर से लेकर पाराघाट नीलागर नदी तक खसरा नंबर 170 जो कि मूल खसरा था जिसका रकबा 10.21 एकड़ था उसे संबंधित पटवारी श्री अभिनव गिरी गोस्वामी के द्वारा सन् 2022 में प्लांट वालों से लेन-देन कर इस खसरे को बटांकन करके 2.94 एकड़ भूमि को प्लांट के नाम पर चढ़ा दिया जिसकी जानकारी ग्रामवासियों को नहीं है और न ही तबादला नीति का पालन किया गया है, उक्त भूमि गांव की घरसा भूमि था, जिसमें पूर्व में मनरेगा के तहत मिट्टी, मुरूम सड़क निर्माण कार्य हुए हैं। संबंधित अधिकारियों के ऊपर जाँच कर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने की कृपा करने की मांग की है।
आवेदनों के साथ किसानों के नाम और हस्ताक्षर की दो पेज की सूची भी संलग्न है और सभी आवेदनों पर कलेक्टर कार्यालय बिलासपुर का दिनांक 31.08.2026 का प्राप्ति सील लगा हुआ है।
जनहित में अपील –
यह मामला केवल 117 एकड़ जमीन का नहीं, बल्कि 40 किसान परिवारों के भविष्य, उनके पुनर्वास और उनके विश्वास का है। यदि नौकरी और पुनर्वास के वादे पर ली गई जमीन 12 साल तक बंजर पड़ी रही और फिर कूट-रचना कर दूसरी कंपनी को बेच दी गई, तो यह छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता और औद्योगिक नीति के उद्देश्यों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
शासकीय घरसा भूमि खसरा नं. 170 जैसे आरोपों की निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है। जिला प्रशासन से निवेदन है कि किसानों के 6 बिंदुओं पर की गई जांच मांग और पुलिस-प्रशासन द्वारा किसानों को भयभीत करने के आरोपों की उच्च-स्तरीय, समयबद्ध जांच कराई जाए।
सभी ग्रामवासियों से अपील है कि शांति और कानून के दायरे में रहकर अपने दस्तावेज सुरक्षित रखें और प्रशासन को सहयोग करें। यह लड़ाई किसी कंपनी के विरोध की नहीं, बल्कि अपने हक, अपनी जमीन और आने वाली पीढ़ियों के हक की सुरक्षा की है।
नोट: इस समाचार में लगाए गए सभी आरोप किसानों द्वारा कलेक्टर को दिए गए आवेदन के आधार पर हैं। हमारा उद्देश्य किसी संस्था को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर सत्य को सामने लाना है।
