Bilaspur Excise News: वर्दी बिना वसूली? SI वेद नेताम पर 5 हजार और मारपीट के आरोप, महिला आरक्षक के प्रेस वाले बयान से हड़कंप
बिलासपुर आबकारी विभाग से शर्मसार करने वाला मामला। SI वेद नेताम पर 5000 वसूली और मारपीट का आरोप, महिला आरक्षक ने खुद को प्रेस बताया। दोहरी नौकरी और आचरण नियम उल्लंघन पर जांच की मांग।

बिलासपुर आबकारी विभाग में वर्दी के बिना वसूली? SI वेद नेताम पर 5 हजार वसूली और मारपीट के गंभीर आरोप, महिला आरक्षक बोली- मैं भी प्रेस में हूं, दोहरी नौकरी पर उठा बवाल

सरकारी नौकरी में रहते हुए प्रेस में काम करने का दावा, आचरण नियमों के उल्लंघन पर जांच की मांग
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर के जिला आबकारी कार्यालय से विभाग को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। आबकारी विभाग की एक कार्रवाई को लेकर पीड़ित परिवार ने SI वेद नेताम और उनकी टीम पर अवैध वसूली, कार्यालय में बुलाकर दोबारा पैसे मांगने और युवक से मारपीट के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो वायरल होने के बाद आबकारी महकमा सवालों के घेरे में है।
डिस्पोजल और पानी पाउच के नाम पर कार्रवाई, 5 हजार वसूली का आरोप
पीड़ित परिवार का कहना है कि वे शराब की बिक्री नहीं करते। आरोप है कि करीब तीन महीने पहले आबकारी टीम ने उनके घर में रखे डिस्पोजल गिलास और पानी के पाउच को शराब बिक्री का आधार बताकर जब्ती की कार्रवाई की।
परिवार का दावा है कि उसी कार्रवाई के नाम पर मौके पर ही उनसे 5 हजार रुपये ले लिए गए, जिसकी कोई रसीद नहीं दी गई।
दोबारा कार्यालय बुलाया, फिर पैसे की मांग और मारपीट का आरोप
परिवार के अनुसार मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। कुछ दिन पहले उन्हें फोन कर जिला आबकारी कार्यालय, बिलासपुर बुलाया गया। आरोप है कि कार्यालय में फिर से पैसे की मांग की गई। विरोध करने पर कार्यालय परिसर में ही एक युवक के साथ मारपीट की गई।
मीडिया के सामने हंगामा, पत्रकारों को धमकाने का आरोप – वीडियो बना सबसे बड़ा सबूत
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पूरी घटना मीडिया कर्मियों के सामने हुई है। मामले की सूचना पर जब मीडिया रिपोर्टर जिला आबकारी कार्यालय बिलासपुर में पक्ष जानने पहुंचे, तो वहां हंगामा हो गया।
आरोप है कि सच्चाई उजागर करने पहुंचे पत्रकारों को ही आबकारी विभाग के कर्मचारियों द्वारा धमकाया गया और खबर चलाने से रोकने का प्रयास किया गया। वायरल वीडियो में आबकारी विभाग की एक महिला आरक्षक और रिपोर्टर के बीच तीखी बहस होती दिख रही है, जिसमें महिला आरक्षक द्वारा मीडिया कर्मियों से अभद्रता और धमकी भरे लहजे में बात करने का आरोप है।
यह वीडियो इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सबूत माना जा रहा है क्योंकि घटना मीडिया की मौजूदगी में ही हुई है।
महिला आरक्षक बोली- मैं भी प्रेस में हूं, दोहरी नौकरी पर उठा बवाल
बहस के दौरान महिला आरक्षक द्वारा खुद को मीडिया प्रेस से जुड़ा होना बताने का दावा किया जा रहा है। इसी एक बयान ने पूरे मामले को वसूली से हटाकर सेवा नियमों के उल्लंघन के बड़े सवाल में बदल दिया है।
सबसे बड़ा सवाल – क्या सरकारी नौकरी करते हुए प्रेस में भी काम किया जा सकता है?
यही इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू है। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम के तहत कोई भी शासकीय सेवक शासन की अनुमति के बिना किसी अन्य व्यवसाय, प्रेस, मीडिया संस्थान या निजी नौकरी नहीं कर सकता। यह दोहरी नौकरी और हितों के टकराव का मामला माना जाता है।
अब सवाल उठता है कि यदि महिला आरक्षक वास्तव में प्रेस में कार्यरत हैं, तो क्या उन्होंने आबकारी विभाग में रहते हुए इसकी अनुमति ली है? और यदि वे प्रेस में नहीं हैं, तो ऑन ड्यूटी खुद को प्रेस बताकर उन्होंने मीडिया को गुमराह क्यों किया?
बिना वर्दी के मिले SI वेद नेताम, नियमों पर सवाल
इस पूरे मामले में SI वेद नेताम भी सवालों के घेरे में हैं। वायरल वीडियो में वे कार्यालय में बिना वर्दी के टेबल पर बैठे काम करते नजर आ रहे हैं। महिला आरक्षक भी बिना वर्दी में मौजूद बताई जा रही है। सवाल है कि यदि दोनों ड्यूटी पर थे, तो बिना वर्दी के क्यों थे? और बिना वर्दी के किसी परिवार को कार्यालय बुलाकर कार्रवाई कैसे की जा सकती है?
5 हजार वापस करो, हम खुद चालान पटाएंगे – परिवार अड़ा
मीडिया के हस्तक्षेप के बाद अधिकारियों ने परिवार को कोर्ट में चालान जमा करने की बात कही। इस पर परिवार ने साफ कहा कि पहले लिए गए 5 हजार रुपये वापस कर दीजिए, हम खुद कोर्ट में चालान जमा कर देंगे।
परिवार का दावा है कि इसके बाद अधिकारी उन्हें समझाने लगे कि आप चालान मत पटाइए, हम जमा कर देंगे। यदि मामला कोर्ट चालान का था, तो पहले 5 हजार लेने का आरोप क्यों और अब विभाग खुद चालान जमा करने की बात क्यों कह रहा है, यही सबसे बड़ा सवाल है।
SI वेद नेताम ने आरोपों को बताया झूठा
वहीं दूसरी तरफ SI वेद नेताम ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया है।
फिलहाल मामले की सच्चाई जिला आबकारी कार्यालय बिलासपुर के जब्ती पंचनामा, चालान दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज और निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। अब देखना होगा कि आबकारी विभाग और जिला प्रशासन बिलासपुर इस पर क्या कार्रवाई करता है।
डिस्क्लेमर: यह पूरी घटना मीडिया कर्मियों के सामने जिला आबकारी कार्यालय, बिलासपुर में हुई है। इस दौरान मीडिया कर्मियों को धमकाने और खबर प्रकाशित करने से रोकने के भी आरोप सामने आए हैं, जिसका वायरल वीडियो साक्ष्य के रूप में मौजूद है। खबर में पीड़ित परिवार के आरोपों को उनके बयानों के आधार पर प्रकाशित किया गया है।



