जांजगीर-चांपा ब्रेकिंग: सरखों में नो-एंट्री व्यवस्था फेल, आधी रात 12:30 बजे सड़कों पर उतरे ग्रामीण, 15 से ज्यादा राखड़ वाहनों को रोका
जांजगीर-चांपा के सरखों में नो-एंट्री के बावजूद राखड़ से लोड हाइवा-ट्रेलरों का अवैध परिवहन जारी। आधी रात 12:30 बजे आक्रोशित ग्रामीणों ने 15 से ज्यादा भारी वाहनों को रोका, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग।

जांजगीर-चांपा : सरखों में नो-एंट्री व्यवस्था फेल, आधी रात को सड़कों पर उतरे ग्रामीण, 15 से अधिक राखड़ लोडेड वाहनों को खदेड़ा

जांजगीर-चांपा / सरखों :- जांजगीर-चांपा जिले के सरखों क्षेत्र में प्रशासन की नो-एंट्री व्यवस्था पूरी तरह फेल साबित हो रही है। भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध के बावजूद दिन-रात सैकड़ों राखड़ (Fly Ash) से भरे हाइवा और ट्रेलर गांव की मुख्य सड़क से बेरोकटोक गुजर रहे हैं। इससे ग्रामीण सड़कें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
प्रशासन ने औपचारिकता के लिए नो-एंट्री का बोर्ड तो लगा दिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। ग्रामीणों द्वारा कई बार कलेक्टर, तहसीलदार और यातायात विभाग को लिखित-मौखिक शिकायत करने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद ग्रामीणों का सब्र टूट गया।
आधी रात 12:30 बजे फूटा युवाओं का गुस्सा, सड़क पर लगाया जाम
मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार की देर रात जब राखड़ परिवहन करने वाले भारी वाहनों का काफिला लगातार सरखों मार्ग से गुजर रहा था, तो स्थानीय युवाओं का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। रात करीब 12:30 बजे बड़ी संख्या में युवा और बुजुर्ग लाठी-डंडे नहीं, बल्कि हिम्मत के साथ सड़क पर उतर आए और 15 से अधिक भारी वाहनों को रोक दिया। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
ग्रामीणों ने एक-एक ट्रक चालक को रोककर वाहन के दस्तावेज, फिटनेस, परमिट और वाहन मालिक के बारे में जानकारी मांगी। ग्रामीणों का आरोप है कि किसी भी चालक के पास सरखों मार्ग पर चलने का वैध परमिट या रूट चार्ट नहीं मिला। सभी वाहन बिना अनुमति के चोरी-छिपे राखड़ परिवहन कर रहे थे।
“अच्छी-भली सड़क को जानबूझकर किया जा रहा बर्बाद”
सरखों के ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत ग्रामीणों के आवागमन, स्कूली बच्चों, अस्पताल जाने वाले मरीजों और रोजमर्रा के उपयोग के लिए बनाई गई है, किसी औद्योगिक कॉरिडोर के लिए नहीं।
ओवरलोड राखड़ लोडेड हाइवा-ट्रेलर के चलने से
• सड़क जगह-जगह से धंस गई है और बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।
• दोपहिया वाहन चालक आए दिन हादसे का शिकार हो रहे हैं।
• राखड़ की धूल से पूरे गांव में प्रदूषण फैल गया है, लोगों को सांस लेना मुश्किल हो रहा है, घरों में धूल की परत जम रही है।
• स्कूली बच्चों और बुजुर्गों की आवाजाही खतरनाक हो गई है।
एक स्थानीय ग्रामीण ने बताया, “हमने पहले भी वाहन मालिकों और ड्राइवरों को कई बार समझाइश दी थी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। हमारी सड़क को बर्बाद किया जा रहा है। मजबूरन हमें रात में सड़क पर उतरना पड़ा। यह जनहित और सुरक्षा का मामला है।”
गौर करने वाली बात यह है कि ग्रामीणों ने विरोध के दौरान पूरी तरह शांतिपूर्ण रवैया अपनाया। किसी भी वाहन में तोड़फोड़ नहीं की, किसी चालक से मारपीट नहीं की। बल्कि समझाइश देकर सभी 15 वाहनों को वापस उसी दिशा में लौटा दिया, जिस दिशा से वे आए थे।
जिला प्रशासन से ग्रामीणों की 4 बड़ी मांग
सरखों के ग्रामीणों और युवाओं ने जिला प्रशासन, कलेक्टर जांजगीर-चांपा, पुलिस अधीक्षक और यातायात विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है –
1. नो-एंट्री नियम का कड़ाई से पालन: सरखों मार्ग पर लगे नो-एंट्री बोर्ड का सख्ती से पालन कराया जाए और स्थायी बैरिकेडिंग की जाए।
2. रात में अवैध परिवहन पर रोक: रात के अंधेरे में चोरी-छिपे चल रहे राखड़ परिवहन पर तत्काल और पूर्णतः रोक लगाई जाए।
3. परिवहन कंपनियों पर FIR और जुर्माना: बिना परमिट चल रहे वाहन मालिकों और संबंधित फैक्ट्री/परिवहन कंपनियों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाए।
4. सड़क की तत्काल मरम्मत: ओवरलोड वाहनों से जर्जर हो चुकी सरखों की मुख्य मार्ग की तत्काल मरम्मत और डामरीकरण कराया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यह मामला केवल एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जन-सुविधा और सड़क सुरक्षा से जुड़ा है। अगर 7 दिनों के भीतर प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, तो समस्त क्षेत्र के ग्रामीण एकजुट होकर एसडीएम कार्यालय और कलेक्ट्रेट का घेराव कर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अपील: यह खबर जनहित में जारी की गई है ताकि जिम्मेदार अधिकारियों तक सरखों के ग्रामीणों की आवाज पहुंच सके।